⚔️ पूर्व मध्यकालीन भारत / राजपूत काल (800 ई. – 1200 ई.)

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⚔️ पूर्व मध्यकालीन भारत / राजपूत काल (800 ई. – 1200 ई.)

क्षेत्रीय राजवंश • त्रिपक्षीय संघर्ष • स्थापत्य, शिक्षा एवं तुर्की आक्रमण — सिविल सेवा परीक्षा विशेष
Rajput Period Early Medieval India Complete Notes

📸 पूर्व मध्यकालीन भारत / राजपूत काल | त्रिपक्षीय संघर्ष | प्रमुख राजवंश | तराइन युद्ध | Complete Notes | Image: apnaupsc.in

📌 भूमिका एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: वर्द्धन राजवंश के महान सम्राट हर्षवर्धन (647 ई.) की मृत्यु के बाद उत्तर भारत में कोई सुदृढ़ केंद्रीय सत्ता स्थापित नहीं रही। इसके परिणामस्वरूप संपूर्ण साम्राज्य बिखर गया और उत्तर भारत अनेक छोटे-छोटे राज्यों तथा क्षेत्रीय राजवंशों में विभाजित हो गया। इस राजनीतिक विखंडन के दौर में सामंतवाद का अत्यधिक विस्तार हुआ और कई राजपूत शक्तियों का उत्कर्ष हुआ। इसी कालखंड को भारतीय इतिहास में 'पूर्व मध्यकाल' या 'राजपूत काल' (800 ई. – 1200 ई.) के नाम से जाना जाता है।

🏛️ इस काल के प्रमुख राजवंश

इस संक्रमण काल में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में निम्नलिखित राजवंशों ने शासन किया:

उत्तर एवं पश्चिम भारत

  • गुर्जर-प्रतिहार
  • चौहान (चाहमान)
  • चंदेल
  • गहड़वाल
  • परमार
  • गुजरात के चालुक्य (सोलंकी)

पूर्वी भारत (बंगाल व बिहार)

  • पाल वंश
  • चंद्र वंश
  • सेन वंश

दक्कन / दक्षिण भारत

  • राष्ट्रकूट वंश (दक्षिण का राजवंश, परंतु उत्तर भारत की राजनीति में अत्यंत सक्रिय)

⚔️ कन्नौज का त्रिपक्षीय संघर्ष (Tripartite Struggle)

8वीं से 10वीं शताब्दी के मध्य उत्तर भारत के सर्वाधिक महत्वपूर्ण राजनीतिक व व्यापारिक केंद्र 'कन्नौज' पर संप्रभुता स्थापित करने के लिए तीन महाशक्तियों के बीच एक दीर्घकालिक संघर्ष हुआ, जिसे इतिहास में त्रिपक्षीय संघर्ष कहा जाता है:

गुर्जर-प्रतिहार वंश
(पश्चिम भारत)
पाल वंश
(पूर्वी भारत/बंगाल)
राष्ट्रकूट वंश
(दक्षिण भारत/दक्कन)
🎯 इस त्रिपक्षीय संघर्ष में कई चरणों के उतार-चढ़ाव के बाद अंततः गुर्जर-प्रतिहारों को अंतिम सफलता मिली और उन्होंने कन्नौज पर स्थायी अधिकार स्थापित किया।

👑 गुर्जर-प्रतिहार वंश

  • संस्थापक: नागभट्ट प्रथम (इन्होंने अरब आक्रमणकारियों के विरुद्ध एक शक्तिशाली दीवार का कार्य किया)
  • महानतम शासक: मिहिर भोज – वैष्णव धर्म के अनुयायी, 'आदिवराह' व 'प्रभास' जैसी उपाधियाँ
  • राजधानी: प्रारंभ में उज्जैन, बाद में स्थायी रूप से कन्नौज

👑 पाल वंश (बंगाल) – UPSC का सबसे प्रिय विषय

🏛 गोपाल (750 ई.) – संस्थापक

  • बंगाल में फैली राजनीतिक अराजकता (मात्स्यन्याय) को समाप्त करने के लिए जनता और सामंतों द्वारा निर्वाचित
  • UPSC भारत के इतिहास में लोकतांत्रिक निर्वाचन का अनूठा उदाहरण

🏛 धर्मपाल

  • कन्नौज संघर्ष में सक्रिय भूमिका
  • प्रसिद्ध 'विक्रमशिला विश्वविद्यालय' (भागलपुर, बिहार) की स्थापना
  • बौद्ध शिक्षा (विशेषकर वज्रयान शाखा) और तिब्बती विद्वानों का प्रमुख केंद्र

🏛 देवपाल

  • पाल साम्राज्य का महानतम और प्रतापी शासक
  • 'ओदंतपुरी विश्वविद्यालय' (बिहारशरीफ) के निर्माण में सहयोग

👑 बंगाल के अन्य राजवंश (चंद्र एवं सेन वंश)

चंद्र वंश

  • पूर्वी बंगाल के क्षेत्र में शासन
  • बौद्ध धर्मावलम्बी

सेन वंश

  • बल्लाल सेन: बंगाल में 'कुलीन प्रथा' की शुरुआत की
  • लक्ष्मण सेन: दरबारी कवि जयदेव (रचना: 'गीतगोविन्द')

👑 चंदेल वंश (जेजाकभुक्ति)

  • क्षेत्र: बुंदेलखंड (जेजाकभुक्ति) | राजधानी: महोबा | सांस्कृतिक केंद्र: खजुराहो
  • संस्थापक: नन्नुक (9वीं शताब्दी)
  • खजुराहो मंदिर समूह: नागर शैली (950-1050 ई.), मूल 85 मंदिर, वर्तमान 25 सुरक्षित
  • विद्याधर चंदेल: UPSC महमूद गजनवी का सफलतापूर्वक प्रतिरोध करने वाला एकमात्र राजपूत शासक
  • आल्हा-ऊदल प्रसंग: चंदेल राजा परमार्दिदेव (परमाल) के वीर सेनापति – लोककथा 'आल्हाखंड' (जगनीक रचित) में अमर

👑 परमार वंश (मालवा)

  • राजधानी: 'धारा नगरी' (धार, मध्य प्रदेश)
  • राजा भोज (भोजदेव): महानतम शासक, प्रकांड विद्वान
  • भोजपुर मंदिर (भोजेश्वर शिव मंदिर) और धार में सरस्वती सदन (भोजशाला) के निर्माता
  • प्रमुख रचनाएँ: समरांगण सूत्रधार (वास्तुकला), सरस्वतीकण्ठाभरण (काव्यशास्त्र), राजमार्तण्ड (योगसूत्र)

👑 गुजरात के चालुक्य या सोलंकी वंश

क्षेत्र व राजधानी

  • गुजरात का क्षेत्र, राजधानी अन्हिलवाड़ा (पाटन)
  • संस्थापक: मूलराज प्रथम
  • यह दक्षिण के बादामी या कल्याणी चालुक्यों से सर्वथा भिन्न हैं

प्रमुख शासक

  • भीम प्रथम: मोढेरा सूर्य मंदिर के निर्माता
  • कुमारपाल: जैन धर्म के संरक्षक, आचार्य हेमचन्द्र दरबारी

👑 गहड़वाल वंश (कन्नौज)

  • संस्थापक: चन्द्रदेव (प्रतिहारों के बाद कन्नौज पर अधिकार)
  • जयचन्द्र गहड़वाल: अंतिम शक्तिशाली राजा
  • संयोगिता स्वयंवर प्रसंग – पृथ्वीराज रासो में वर्णित

👑 चौहान या चाहमान वंश (अजमेर)

  • प्रारंभिक क्षेत्र: शाकंभरी (सांभर, राजस्थान), संस्थापक वासुदेव
  • अजयराज: 'अजमेर' नगर की स्थापना
  • विग्रहराज चतुर्थ (विसलदेव): दिल्ली (ढिल्लिका) पर चौहानों का अधिकार स्थापित किया, रचना: 'हरिकेलि'
  • पृथ्वीराज तृतीय (पृथ्वीराज चौहान): दरबारी कवि चंदबरदाई – रचना: 'पृथ्वीराज रासो'

⚖️ ऐतिहासिक कानूनी ग्रंथ: दायभाग बनाम मिताक्षरा

कानूनी ग्रंथलेखक / रचनाकारभौगोलिक क्षेत्रमुख्य कानूनी विशेषता
दायभागजीमूतवाहनकेवल बंगाल और असमपुत्र को पिता के जीवनकाल में संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं, मृत्यु के बाद ही अधिकारी बनता है
मिताक्षराविज्ञानेश्वरबंगाल को छोड़कर शेष संपूर्ण भारतयाज्ञवल्क्य स्मृति पर टीका। पुत्र को जन्म लेते ही पिता की पैतृक संपत्ति में सह-अंशधारक अधिकार

⚔️ तुर्की आक्रमण, नालंदा-विक्रमशिला का विनाश एवं निर्णायक युद्ध

🚫 बख्तियार खिलजी और विश्वविद्यालयों का विध्वंस (1193-1203 ई.)

  • मुहम्मद गोरी का सैन्य कमांडर मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी
  • नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया
  • अमूल्य पुस्तकालयों को जला दिया गया, भिक्षुओं का कत्लेआम
युद्ध का नामवर्षकिसके मध्य संघर्षपरिणाम एवं ऐतिहासिक महत्व
तराइन का प्रथम युद्ध1191 ई.पृथ्वीराज चौहान बनाम मुहम्मद गोरीपृथ्वीराज चौहान की प्रचंड विजय। गोरी बुरी तरह घायल होकर भागा।
तराइन का द्वितीय युद्ध1192 ई.पृथ्वीराज चौहान बनाम मुहम्मद गोरीमुहम्मद गोरी की कूटनीतिक विजय। पृथ्वीराज पराजित। उत्तर भारत में स्थायी तुर्की सत्ता की नींव।
चंदावर का युद्ध1194 ई.जयचन्द्र गहड़वाल बनाम मुहम्मद गोरीजयचन्द्र पराजित एवं मारा गया। कन्नौज और गंगा-यमुना दोआब पर तुर्की नियंत्रण।

📌 राजपूत काल का समापन एवं दिल्ली सल्तनत का उदय

तराइन व चंदावर में राजपूत शक्तियाँ कमजोर हुईं
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मुहम्मद गोरी का संपूर्ण उत्तर भारत पर प्रभुत्व स्थापित हुआ
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गोरी ने विजित क्षेत्रों का प्रभारी अपने दास सेनापति 'कुतबुद्दीन ऐबक' को बनाया
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1206 ई. में मुहम्मद गोरी की अचानक मृत्यु
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कुतबुद्दीन ऐबक ने स्वतंत्र शासक के रूप में लाहौर/दिल्ली से कमान संभाली
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भारत में 'गुलाम वंश / ममलूक वंश' की स्थापना – "दिल्ली सल्तनत" का आरम्भ (1206 ई.)

🎯 त्वरित पुनरावृत्ति मैट्रिक्स (Quick Revision Matrix)

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य / घटनासही मिलान / उत्तरदायी शासक या लेखक
जनता द्वारा निर्वाचित पाल राजागोपाल
विक्रमशिला विश्वविद्यालय के संस्थापकधर्मपाल
ओदंतपुरी विश्वविद्यालय के मूल आधारगोपाल / देवपाल
संस्कृत महाकाव्य 'गीतगोविन्द' के रचयिताजयदेव (लक्ष्मण सेन के दरबारी)
बंगाल का उत्तराधिकार कानून 'दायभाग'जीमूतवाहन
खजुराहो के नागर शैली मंदिरों के निर्माताचंदेल राजवंश
महमूद गजनवी का डटकर सामना करने वाले चंदेल वीरविद्याधर चंदेल
धारा नगरी के विख्यात विद्वान राजा व भोजपुर के निर्माताराजा भोज (परमार वंश)
गुजरात के प्रसिद्ध मोढेरा सूर्य मंदिर के निर्माताभीम प्रथम (सोलंकी वंश)
प्रसिद्ध जैन आचार्य हेमचन्द्र के मुख्य संरक्षककुमारपाल (सोलंकी वंश)
तोमरों से दिल्ली छीनकर चौहान साम्राज्य में मिलाने वालेविग्रहराज चतुर्थ (विसलदेव)
ऐतिहासिक महाकाव्य 'पृथ्वीराज रासो' के लेखकचंदबरदाई
प्राचीन विश्वविद्यालयों (नालंदा-विक्रमशिला) का विध्वंसकबख्तियार खिलजी (1193-1200 ई.)
दिल्ली सल्तनत की आधिकारिक स्थापना का वर्ष1206 ई. (कुतबुद्दीन ऐबक द्वारा)

📌 निष्कर्ष: पूर्व मध्यकाल (800 ई. - 1200 ई.) भारतीय इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संक्रमण काल था। इसी काल में सामंतवाद के साए में पराक्रमी राजपूत राजवंशों का उदय हुआ, जिन्होंने स्थापत्य के क्षेत्र में खजुराहो, भोजपुर और मोढेरा जैसे अनुपम रत्नों का निर्माण कराया। शिक्षा के क्षेत्र में विक्रमशिला और ओदंतपुरी जैसे केंद्र चमके, तथा साहित्य में गीतगोविन्द और दायभाग जैसे ग्रंथों की रचना हुई। परंतु, आंतरिक एकता के अभाव के कारण तराइन और चंदावर के मैदानों में राजपूतों की पराजय हुई, जिसने प्राचीन भारतीय अध्याय का पटाक्षेप कर भारत को इतिहास के एक नए मोड़ — "दिल्ली सल्तनत" — के द्वार पर लाकर खड़ा कर दिया।

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