🕌 दिल्ली सल्तनत (1206–1526 ई.)
📸 दिल्ली सल्तनत (1206-1526) | गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद, लोदी | Complete Notes | Image: apnaupsc.in
📌 भूमिका: 1192 ई. के तराइन के द्वितीय युद्ध के बाद उत्तर भारत में तुर्की शक्ति की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। 1206 ई. में मुहम्मद गोरी की मृत्यु के बाद उसके दास सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने स्वतंत्र शासन स्थापित किया। यहीं से दिल्ली सल्तनत का इतिहास प्रारम्भ होता है।
🏛 दिल्ली सल्तनत के पाँच वंश
1206-1290
1290-1320
1320-1414
1414-1451
1451-1526
⚔ मंगोल कौन थे?
- मूल निवास: मंगोलिया
- संस्थापक: चंगेज खाँ (तेमूजिन) – 1206 ई.
- मंगोल विश्व के सबसे भयानक घुड़सवार योद्धा थे
🏛 1. गुलाम / ममलूक / इलबरी वंश (1206-1290)
👑 कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210)
- उपाधि: लाखबख्श (लाखों दान देने वाला)
- राजधानी: लाहौर (दिल्ली नहीं)
- गुलाम वंश का संस्थापक
🏛 प्रमुख निर्माण
- कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद (दिल्ली)
- ढाई दिन का झोपड़ा (अजमेर) – पूर्व में संस्कृत विद्यालय
- कुतुब मीनार (निर्माण आरम्भ)
- मृत्यु: 1210 ई., लाहौर में चौगान (पोलो) खेलते समय
👑 इल्तुतमिश (1211-1236) – दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक
- राजधानी लाहौर से दिल्ली स्थानांतरित की
- दिल्ली को स्थायी राजधानी बनाया
- बंगाल पर पुनः नियंत्रण
- चहलगानी (तुर्कान-ए-चहलगानी): 40 तुर्क अमीरों का शक्तिशाली समूह
- मुद्रा सुधार: टंका (Silver) और जीटल (Copper)
- खिलाफत से मान्यता प्राप्त करने वाला प्रथम सुल्तान
- 1221 ई. में चंगेज खाँ सिंधु तक आया – मंगोल पहली बार भारत सीमा पर
👸 रज़िया सुल्तान (1236-1240) – भारत की प्रथम एवं एकमात्र मुस्लिम महिला शासक
- इल्तुतमिश की पुत्री – उसने अपने पुत्रों को अयोग्य मानकर रज़िया को उत्तराधिकारी बनाया
- तुर्क अमीरों का विरोध: महिला शासक, पर्दा प्रथा का पालन नहीं, अबीसीनियाई (हब्शी) याकूत को महत्व
- मलिक अल्तूनिया (भटिंडा का सूबेदार) ने विद्रोह किया
- मृत्यु: 1240 ई., कैथल (हरियाणा) में अल्तूनिया सहित मारी गई
👑 गयासुद्दीन बलबन (1266-1287)
- मूलतः चहलगानी का सदस्य, बाद में नासिरुद्दीन महमूद का नायब, फिर सुल्तान
- चहलगानी का अंत: इल्तुतमिश ने बनाई, बलबन ने समाप्त की
- रक्त एवं लौह नीति (Blood and Iron Policy): विद्रोहियों का निर्मम दमन
- मेवातियों एवं डाकुओं का दमन
- उपाधियाँ: जिल्ले-इलाही (Zill-i-Ilahi), नियामत-ए-खुदाई (Niyabat-i-Khudai) – "ईश्वर की छाया", "ईश्वर का प्रतिनिधि"
- सिजदा एवं पैबोस: दरबारी प्रथा की शुरुआत
🏛 2. खिलजी वंश (1290-1320)
👑 अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316) – दिल्ली सल्तनत का सबसे शक्तिशाली शासक
- उपाधि: सिकंदर-ए-सानी (द्वितीय सिकंदर)
⚔ प्रमुख विजय (दक्षिण भारत अभियान)
- मलिक काफूर: दक्षिण भारत अभियान का सेनापति
💰 आर्थिक सुधार एवं बाजार नियंत्रण
- भूमि पैमाइश – राजस्व उपज का 50%
- कर: खराज (भूमि कर), घरी (गृह कर), चराई (चरागाह कर)
- बाजार नियंत्रण: दीवान-ए-रियासत, शहना-ए-मंडी
- सल्तनत काल में मंगोलों को सबसे अधिक पराजित करने वाला शासक
📚 समकालीन लेखक
- अमीर खुसरो – "तूती-ए-हिंद" (भारत की तोता)
- अमीर हसन
🏛 3. तुगलक वंश (1320-1414)
👑 गयासुद्दीन तुगलक (1320-1325)
- तुगलक वंश का संस्थापक
- तुगलकाबाद नगर की स्थापना
👑 मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351) – "विक्रमादित्य सा विचारक, बलबन सा क्रूर"
📌 प्रमुख प्रयोग (विफल)
- राजधानी स्थानांतरण (1327): दिल्ली → दौलताबाद (देवगिरि)
- खजाना सिक्का टंकण (तोका सिक्का) – ताँबे के सिक्के को चाँदी के बराबर मूल्य
- अमीर-ए-कोही (कृषि विभाग): कृषि सुधार
- दीवान-ए-अमीर-ए-कोही – कृषि ऋण
- खुरासान प्रयोग: खुरासान पर आक्रमण की योजना
- कराचिल प्रयोग: कुमाऊँ-गढ़वाल अभियान
🌍 इब्नबतूता
- मोरक्को का यात्री
- मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में आया
- ग्रंथ: रिहला (सफरनामा)
👑 फिरोज शाह तुगलक (1351-1388)
- प्रमुख कार्य: युद्ध नहीं, विकास कार्य
- नहरों का निर्माण: यमुना, सतलुज, घग्घर से नहरें निकालीं
- नए नगर: फिरोजाबाद, फिरोजपुर, हिसार, जौनपुर
- दीवान-ए-खैरात – गरीबों के लिए विभाग
- गुलाम प्रथा को संस्थागत रूप दिया
- जजिया कर लगाया
- कुतुब मीनार की ऊपरी मंजिल का निर्माण
📚 फिरोज की रचनाएँ
- फुतुहात-ए-फिरोजशाही
- आत्मकथा लिखने वाला प्रथम सुल्तान
⚔ तैमूर का आक्रमण (1398)
- तैमूर (तैमूरलंग): समरकंद का शासक
- 1398 ई. में दिल्ली पर आक्रमण
- परिणाम: दिल्ली की भीषण लूट, सल्तनत कमजोर
- तैमूर ने वापस लौटते समय ख़िज़्र खाँ को दिल्ली का शासक नियुक्त किया
🏛 4. सैय्यद वंश (1414-1451)
- संस्थापक: ख़िज़्र खाँ (तैमूर का नियुक्त शासक)
- प्रभावशाली शासक नहीं, सल्तनत सीमित क्षेत्र तक सिमट गई
- अंतिम शासक: अलाउद्दीन आलमशाह – स्वयं सिंहासन छोड़कर बदायूँ चला गया
- उसके बाद बहलोल लोदी ने सत्ता संभाली
🏛 5. लोदी वंश (1451-1526)
👑 बहलोल लोदी (1451-1489)
- लोदी वंश का संस्थापक
- अफगान सरदार
- सुल्तान को प्रथम एवं समानों में प्रथम मानते थे (तुर्कों की तरह निरंकुश नहीं)
👑 सिकंदर लोदी (1489-1517)
- महान शासक, साम्राज्य विस्तारक
- आगरा नगर की स्थापना
- दोहरे गुंबद (Double Dome) की तकनीक का विकास
- गज गणना कराई
- ज़ब्त प्रणाली राजस्व व्यवस्था
📚 शेख रुकुनुद्दीन
- फारसी कवि, सिकंदर लोदी के दरबारी
👑 इब्राहिम लोदी (1517-1526)
- अफगान सरदारों से अलगाव
- दारा शिकोह से असंतोष – दारा ने बाबर को दिल्ली पर आक्रमण के लिए आमंत्रित किया
- 1526 ई. – पानीपत का प्रथम युद्ध – बाबर ने इब्राहिम लोदी को पराजित किया
🏛 दिल्ली सल्तनत का प्रशासन
| पद/विभाग | अधिकारी | कार्य |
|---|---|---|
| प्रधान मंत्री | वजीर | संपूर्ण प्रशासन |
| वित्त मंत्री | मुस्तौफी-ए-ममालिक | वित्तीय मामले |
| न्याय मंत्री | काजी-उल-कुज्जात | न्यायिक व्यवस्था |
| विदेश मंत्री | दाबीर-ए-ममालिक | विदेशी पत्राचार |
| प्रांत शासक | मुक्ति | प्रांतीय प्रशासन |
| जिला अधिकारी | शिकदार | जिला प्रशासन |
| सैन्य विभाग | दीवान-ए-अर्ज | सेना प्रबंधन |
| कृषि विभाग | दीवान-ए-इंशा | कृषि एवं आपूर्ति |
🎯 UPSC/UPPSC/BPSC MODERATE + DIFFICULT FACTS
| तथ्य/घटना | सही मिलान / उत्तर |
|---|---|
| गुलाम वंश का संस्थापक | कुतुबुद्दीन ऐबक |
| दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक | इल्तुतमिश |
| भारत की प्रथम मुस्लिम महिला शासक | रज़िया सुल्तान |
| चहलगानी (तुर्कान-ए-चहलगानी) की स्थापना | इल्तुतमिश |
| चहलगानी का अंत करने वाला | बलबन |
| रक्त एवं लौह नीति (Blood and Iron Policy) | बलबन |
| सिजदा-पैबोस प्रथा शुरू करने वाला | बलबन |
| दीवान-ए-रियासत (बाजार नियंत्रण) | अलाउद्दीन खिलजी |
| मलिक काफूर | अलाउद्दीन खिलजी का सेनापति |
| खजाना सिक्का (तोका सिक्का) | मुहम्मद बिन तुगलक |
| रिहला (सफरनामा) के लेखक | इब्नबतूता |
| आत्मकथा लिखने वाला प्रथम सुल्तान | फिरोज शाह तुगलक |
| तैमूर का दिल्ली पर आक्रमण | 1398 ई. |
| दिल्ली सल्तनत का अंतिम वंश | लोदी वंश |
| पानीपत का प्रथम युद्ध (तोपों का प्रयोग) | 1526 ई. – बाबर |
🔥 अंतिम सुपर रिवीजन (एक नज़र में)
| वंश | काल | संस्थापक | महानतम शासक | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|---|---|
| गुलाम (ममलूक) | 1206-1290 | कुतुबुद्दीन ऐबक | इल्तुतमिश / बलबन | चहलगानी, टंका-जीटल, रज़िया, कुतुब मीनार |
| खिलजी | 1290-1320 | जलालुद्दीन खिलजी | अलाउद्दीन खिलजी | बाजार नियंत्रण, मलिक काफूर, सिकंदर-ए-सानी |
| तुगलक | 1320-1414 | गयासुद्दीन तुगलक | मुहम्मद बिन तुगलक | राजधानी स्थानांतरण, तोका सिक्का, इब्नबतूता, फिरोज (नहरें) |
| सैय्यद | 1414-1451 | ख़िज़्र खाँ | – | तैमूर के बाद, कमजोर शासक |
| लोदी | 1451-1526 | बहलोल लोदी | सिकंदर लोदी | आगरा की स्थापना, दोहरा गुंबद, पानीपत का प्रथम युद्ध (1526) |
📌 निष्कर्ष: दिल्ली सल्तनत (1206-1526) ने लगभग 320 वर्षों तक भारत पर शासन किया। इस काल में प्रशासनिक सुधार, स्थापत्य विकास, बाजार नियंत्रण, मंगोलों से संघर्ष और अंततः तैमूर के आक्रमण के बाद पतन हुआ। 1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को पराजित कर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। UPSC, UPPSC, BPSC में इस काल के वंशों, शासकों, प्रशासनिक पदों, युद्धों, स्थापत्य और साहित्य से नियमित प्रश्न पूछे जाते हैं।

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