प्रारम्भिक मुगल काल (भाग-1) : बाबर, हुमायूँ एवं शेरशाह सूरी : मास्टर नोट्स

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🕌 प्रारम्भिक मुगल काल (भाग-1: 1526–1556 ई.)

मुगल साम्राज्य की स्थापना • हुमायूँ का संघर्ष • द्वितीय अफगान (सूर) साम्राज्य एवं प्रशासनिक नवोन्मेष
Early Mughal Period Babar Humayun Sher Shah Suri Complete Notes

📸 प्रारम्भिक मुगल काल | बाबर, हुमायूँ, शेरशाह सूरी | पानीपत का प्रथम युद्ध, चौसा, कन्नौज | Complete Notes | Image: apnaupsc.in

📌 भूमिका एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1526 ई. में पानीपत के ऐतिहासिक मैदान में लड़े गए प्रथम युद्ध में काबुल के शासक बाबर ने दिल्ली सल्तनत के अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी को करारी शिकस्त दी। इस निर्णायक सैन्य सफलता के साथ ही भारत में तीन शताब्दियों से चले आ रहे 'दिल्ली सल्तनत' के इतिहास का पटाक्षेप हो गया और एक नए संप्रभु राजवंश 'मुगल साम्राज्य' की स्थापना हुई।

🏛️ मुगल राजवंश के शासकों का ऐतिहासिक क्रम

बाबर (1526-1530)

हुमायूँ (1530-1540 – प्रथम चरण)

सूर साम्राज्य / शेरशाह सूरी (1540-1555 – अन्तराल काल)

हुमायूँ (1555-1556 – द्वितीय चरण)

अकबर महान (1556-1605) – अगले भाग में

👑 1. जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर (1526-1530 ई.)

📌 मूल पृष्ठभूमि व वंश

  • जन्म: फरगना (वर्तमान उज्बेकिस्तान)
  • UPSC माता की ओर से चंगेज खाँ का 14वाँ वंशज
  • पिता की ओर से तैमूर लंग का 5वाँ वंशज
  • रक्त सम्मिश्रण: 'चगताई तुर्क' – मुगलों की वास्तविक नस्लीय पहचान
  • उपाधि: 1507 ई. में 'मिर्जा' से 'पादशाह (Badshah)'

⚔️ प्रारम्भिक संघर्ष (मध्य एशिया)

  • सर-ए-पुल का युद्ध (1501 ई.): उज्बेक नेता शैबानी खाँ ने बाबर को पराजित किया
  • इसी युद्ध से बाबर ने 'तुलगमा पद्धति' सीखी – बाद में भारत में अपनाई

⚔️ भारत में बाबर के चार प्रमुख निर्णायक युद्ध

युद्धतिथि/वर्षप्रतिद्वंद्वीपरिणाम एवं परीक्षा फैक्ट
प्रथम पानीपत युद्ध21 अप्रैल, 1526इब्राहिम लोदीबाबर विजयी। भारत में पहली बार बारूद और तोपखाने का प्रभावी उपयोग। तोपखाना विशेषज्ञ: उस्ताद अली और मुस्तफा। इब्राहिम लोदी रणभूमि में मारा गया।
खानवा का युद्ध1527राणा सांगा (मेवाड़)बाबर ने इसे 'जिहाद' (धर्मयुद्ध) घोषित किया। विजय के बाद 'गाज़ी' की उपाधि धारण की।
चंदेरी का युद्ध1528मेदिनी रायबाबर विजयी। मालवा पर मुगल नियंत्रण। राजपूत महिलाओं ने जौहर किया।
घाघरा का युद्ध1529महमूद लोदी (अफगान संघ)पहला युद्ध जो जल और थल (नदी और जमीन) दोनों पर लड़ा गया। बिहार-बंगाल के अफगान पराजित।

🎨 सांस्कृतिक योगदान एवं महत्वपूर्ण तथ्य

  • राणा सांगा व मीरा बाई: राणा सांगा मीरा बाई के श्वसुर थे (मीरा का विवाह युवराज भोजराज से)
  • तुज़ुक-ए-बाबरी (बाबरनामा): चगताई तुर्की भाषा में आत्मकथा
  • चारबाग शैली: भारत में ज्यामितीय समरूपता वाले उद्यान
  • बाबरी मस्जिद (1528): अयोध्या में निर्माण – सेनापति मीर बाकी द्वारा

👑 2. नासिरुद्दीन हुमायूँ (1530-1540 ई. एवं 1555-1556 ई.)

  • हुमायूँ का अर्थ: 'भाग्यशाली' – परंतु इतिहासकार लेनपूल के अनुसार, वह पूरे जीवन लड़खड़ाता रहा
  • सबसे बड़ी रणनीतिक भूल: साम्राज्य को अपने भाइयों (कामरान, अस्करी, हिन्दाल) में विभाजित करना
  • UPSC स्वर्ण मुद्रा (Gold Coin) जारी करने वाला प्रथम मुगल शासक
  • चूनार का प्रथम घेरा (1532): शेर खाँ (भविष्य के शेरशाह) को नियंत्रित करने का प्रयास

⚔️ हुमायूँ की पराजय के दो निर्णायक युद्ध

  • चौसा का युद्ध (1539 ई.): शेर खाँ ने हुमायूँ को परास्त किया। हुमायूँ ने भिश्ती (निज़ाम) की मदद से जान बचाई।
  • कन्नौज / बिलग्राम का युद्ध (1540 ई.): शेरशाह ने हुमायूँ को अंतिम रूप से पराजित किया। हुमायूँ 15 वर्षों के लिए भारत से निर्वासित।

👑 3. शेरशाह सूरी (1540-1545 ई.) – द्वितीय अफगान साम्राज्य

  • UPSC 'अकबर का अग्रदूत' – अकबर की अधिकांश नीतियाँ शेरशाह के नवोन्मेषों पर आधारित
  • वास्तविक नाम: फरीद खाँ
  • प्रारंभिक शिक्षा: जौनपुर (सांस्कृतिक एवं अकादमिक केंद्र)
  • उपाधि: एक शेर को अकेले मारने के कारण 'शेर खाँ'
  • पिता: हसन खाँ सूरी (सासाराम के जागीरदार)
  • चौसा के युद्ध के बाद धारण की: 'शेरशाह', 'हजरत-ए-आला', 'सुल्तान'

📌 शेरशाह सूरी के युगांतरकारी प्रशासनिक एवं आर्थिक सुधार

💰 मुद्रा सुधार

  • UPSC शुद्ध चाँदी का 'रुपया' (178 ग्रेन)
  • ताँबे का 'दाम'
  • विनिमय दर: 64 दाम = 1 रुपया
  • आधुनिक भारतीय मुद्रा प्रणाली का आधार

📜 भू-राजस्व (पट्टा एवं कबूलियत)

  • सिकंदरी गज़ से भूमि नाप
  • 'रे' – फसलों की दर अनुसूची
  • पट्टा (Patta): सरकारी दस्तावेज – भूमि विवरण एवं कर
  • कबूलियत (Kabuliyat): किसान द्वारा कर चुकाने की लिखित सहमति

⚔️ सैन्य सुधार

  • दाग प्रथा: घोड़ों को दागना (भ्रष्टाचार रोकने हेतु)
  • चेहरा प्रणाली: सैनिकों का हुलिया दर्ज करना
  • 50, 200, 250, 500 की सैन्य इकाइयाँ

🛣️ सड़क-ए-आज़म (Grand Trunk Road)

  • सोनारगाँव (बंगाल) से पेशावर तक
  • प्रत्येक 2 कोस पर 'सरायों', कुओं और डाक चौकियाँ
  • यात्रियों की सुरक्षा और डाक प्रणाली

🏛️ स्थापत्य एवं अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • स्थापत्य: दिल्ली का पुराना किला, 'किला-ए-कुहना मस्जिद', सासाराम में अष्टकोणीय मकबरा
  • मारवाड़ अभियान (1544): राजपूत सेनापतियों जैता और कूंपा की वीरता – शेरशाह का कथन: "मात्र एक मुट्ठी बाजरे के लिए मैं हिंदुस्तान का साम्राज्य खो बैठता।"
  • मृत्यु (1545): कालिंजर दुर्ग के घेरे में 'उक्का' नामक आग्नेयास्त्र से विस्फोट

👑 इस्लाम शाह सूरी (1545-1553 ई.)

  • शेरशाह का पुत्र – वास्तविक नाम: जलाल खाँ
  • पिता के प्रशासनिक सुधारों को जारी रखा
  • सैन्य इकाइयाँ: 50, 200, 250, 500 – बाद में मनसबदारी का आधार

⚔️ हुमायूँ की वापसी, सरहिंद का युद्ध एवं अवसान

  • सरहिंद का युद्ध (1555): सेनापति बैरम खाँ ने सिकंदर सूरी को पराजित किया
  • दिल्ली और आगरा पर पुनः अधिकार – मुगल राजवंश पुनर्स्थापित
  • मृत्यु (1556): 'शेर मंडल' (दीनपनाह महल का पुस्तकालय) की सीढ़ियों से गिरकर
  • UPSC हुमायूँ का मकबरा (दिल्ली): निर्माता हाजी बेगम (हमीदा बानो)भारत का पहला भव्य उद्यान मकबरा (चारबाग शैली, दोहरा गुंबद) – ताजमहल का आधार

🎯 त्वरित पुनरावृत्ति मैट्रिक्स (Quick Revision Table)

ऐतिहासिक घटना / प्रशासनिक शब्दावलीसंबंधित सम्राट / सही मिलान
चगताई तुर्क नस्ल व पादशाह उपाधि धारकजहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर
भारत का पहला युद्ध जो जल और थल दोनों पर लड़ा गयाघाघरा का युद्ध (1529) – बाबर
चगताई तुर्की में रचित 'बाबरनामा'बाबर (स्वयं लेखक)
सर्वप्रथम स्वर्ण मुद्रा जारी करने वाला मुगल शासकहुमायूँ
बिलग्राम/कन्नौज युद्ध (1540)हुमायूँ बनाम शेरशाह सूरी
शेरशाह की प्रारंभिक शिक्षा का केंद्रजौनपुर
शुद्ध चाँदी का रुपया (178 ग्रेन) व ताँबे का दामशेरशाह सूरी (64:1)
पट्टा एवं कबूलियत प्रणालीशेरशाह सूरी
सड़क-ए-आज़म (GT Road) का निर्माताशेरशाह सूरी
"एक मुट्ठी बाजरे के लिए साम्राज्य खो बैठता"शेरशाह सूरी (मारवाड़ अभियान 1544)
सरहिंद का युद्ध (1555)हुमायूँ बनाम सिकंदर सूरी
भारत का पहला भव्य उद्यान मकबरा (Double Dome)हुमायूँ का मकबरा, दिल्ली (हाजी बेगम)

📌 निष्कर्ष: प्रारम्भिक मुगल काल (1526–1556 ई.) भारत के राजनीतिक इतिहास का एक अत्यंत गतिशील और उथल-पुथल से भरा दौर था। जहाँ बाबर ने अपनी अचूक तोपखाना तकनीक से भारत में मुगल साम्राज्य का बीजारोपण किया, वहीं हुमायूँ की रणनीतिक अस्थिरताओं के कारण सूर वंश के शेरशाह सूरी को अपनी प्रशासनिक प्रतिभा दिखाने का स्वर्णिम अवसर मिला। शेरशाह द्वारा स्थापित मुद्रा प्रणाली, जीटी रोड और पट्टा-कबूलियत जैसे भू-राजस्व सुधारों ने भारतीय प्रशासनिक ढांचे को सदियों के लिए स्थायित्व दिया। अंततः सूर वंश के गृहयुद्ध का लाभ उठाकर हुमायूँ ने सत्ता तो वापस पा ली, परंतु उसके आकस्मिक अवसान ने भारत के इतिहास को एक नए महायुग — "अकबर महान के युग" — के द्वार पर लाकर खड़ा कर दिया।

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