🕌 मुगल काल (भाग-2): सम्राट अकबर का शासन (1556 ई. – 1605 ई.)
📸 मुगल काल (भाग-2) | सम्राट अकबर (1556-1605) | पानीपत द्वितीय, हल्दीघाटी, मनसबदारी, दीन-ए-इलाही, नवरत्न | Complete Notes | Image: apnaupsc.in
📌 भूमिका एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1556 ई. में हुमायूँ की आकस्मिक मृत्यु के बाद नवजात मुगल साम्राज्य एक बार फिर गहरे राजनीतिक संकट में पड़ गया। उस समय अकबर की आयु मात्र 13 वर्ष थी। हुमायूँ के सबसे विश्वसनीय सेनापति बैरम खाँ के संरक्षण में अकबर का राज्याभिषेक कलानौर (गुरदासपुर) में किया गया। यहीं से भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली शासनकाल का उदय हुआ।
👑 1. प्रारम्भिक काल एवं बैरम खाँ का संरक्षण (1556-1560 ई.)
- जन्म: 1542 ई., अमरकोट (सिंध) – राजपूत राजा वीरसाल के महल में
- माता: हमीदा बानो बेगम
- UPSC द्वितीय पानीपत युद्ध (1556): बैरम खाँ के नेतृत्व में हेमू विक्रमादित्य पराजित
- हेमू की आँख में अप्रत्याशित तीर – पासा पलटा
- बैरम खाँ (खान बाबा): 1556-1560 तक वास्तविक सत्ता
- 1560 ई. में अकबर ने पूर्ण संप्रभुता ली – बैरम खाँ पदमुक्त
- बैरम खाँ की हत्या: गुजरात के पाटन में मुबारक खाँ लोहानी द्वारा
- बैरम खाँ की विधवा सलीमा सुल्तान बेगम से अकबर ने विवाह किया
- बैरम खाँ के पुत्र अब्दुर्रहीम – बाद में 'रहीम' नवरत्न
⚔️ 2. पेटीकोट शासन एवं आधम खाँ का अंत (1560-1562)
- पेटीकोट शासन / अन्तःपुर शासन: अकबर की धाय माँ माहम अनगा और उनके परिवार का प्रभाव
- आधम खाँ (माहम अनगा का पुत्र): मालवा अभियान का सेनापति, अत्यधिक अहंकारी
- प्रधानमंत्री शम्सुद्दीन अतगा खाँ की महल में निर्मम हत्या
- UPSC अकबर के आदेश पर आधम खाँ को आगरा के किले की प्राचीर से दो बार नीचे फिंकवाया – तत्काल मृत्यु
🗺️ 3. प्रमुख सैन्य विजय एवं साम्राज्य विस्तार
🏛 मालवा विजय (1561)
- शासक: बाज बहादुर – संगीत प्रेमी
- रानी: रूपमती – विषपान कर अस्मत की रक्षा
🏛 गोंडवाना / गढ़ा-कटंगा विजय (1564)
- शासिका: महारानी दुर्गावती (वीरांगना)
- मुगल सेनापति: आसफ खाँ
- दुर्गावती ने आत्मसमर्पण के बजाय वीरगति चुनी
🏛 चित्तौड़ एवं रणथंभौर (1568-1569)
- राणा उदयसिंह पहाड़ियों में चले गए
- किले की रक्षा: जयमल और पत्ता (फत्ता)
- अकबर ने आगरा के किले पर उनकी संगमरमर की मूर्तियाँ स्थापित करवाईं
- रणथंभौर के सूरजन हाड़ा ने अधीनता स्वीकारी
🏛 गुजरात (1572-73) एवं बंगाल (1576)
- गुजरात अभियान – अकबर का सबसे तीव्र सैन्य अभियान
- सर्वप्रथम समुद्र दर्शन
- स्मारक: बुलंद दरवाजा (फतेहपुर सीकरी)
- बंगाल-बिहार: दाऊद खाँ कर्रानी पराजित
🛡️ 4. अकबर की राजपूत नीति एवं हल्दीघाटी का युद्ध
🤝 राजपूत नीति – अकबर की दूरदर्शिता
- बल प्रयोग के स्थान पर वैवाहिक संबंध, उच्च मनसब, कूटनीति
- UPSC सर्वप्रथम (1562): आमेर (जयपुर) के कछवाहा राजा भारमल
- भारमल के पुत्र भगवानदास और पौत्र मान सिंह – विश्वसनीय सेनापति
- अपवाद: मेवाड़ – कभी अधीनता स्वीकार नहीं की
- मारवाड़ के राव चन्द्रसेन – 'मारवाड़ का प्रताप'
⚔️ हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध (18 जून, 1576)
- महाराणा प्रताप (मेवाड़) बनाम राजा मान सिंह (मुगल)
- प्रताप के सेनापति: हकीम खाँ सूर (अग्रभाग/हरावल), झाला मान, भामाशाह
- प्रताप का घोड़ा चेतक – वीरगति
- युद्ध रणनीतिक रूप से अनिर्णायक – मुगल प्रताप को बंदी नहीं बना सके
🕌 5. धार्मिक नवोन्मेष: इबादतखाना, मजहर एवं दीन-ए-इलाही
📖 इबादतखाना (1575)
- स्थान: फतेहपुर सीकरी
- प्रारंभ: केवल इस्लामी विद्वान
- 1578 में हिंदू, जैन, पारसी, ईसाई विद्वानों के लिए खुला
📜 मजहर (1579)
- तैयार किया: शेख मुबारक ने
- धार्मिक मामलों में उलेमाओं का एकाधिकार समाप्त
- UPSC अंतिम निर्णय का अधिकार: स्वयं सम्राट (अकबर)
☯️ दीन-ए-इलाही / तौहीद-ए-इलाही (1582)
- कोई नया धर्म नहीं – आचार संहिता
- सभी धर्मों के नैतिक एवं श्रेष्ठ तत्वों का संकलन
- एकमात्र हिंदू अनुयायी: बीरबल (महेश दास)
- समकालीन लेखक मोहसिन फानी – 'दबिस्तान-ए-मजाहिब'
☮️ सुलह-ए-कुल की नीति
- UPSC 'सार्वभौमिक शांति और सहिष्णुता'
- तीर्थयात्रा कर समाप्त (1563)
- जजिया कर समाप्त (1564)
- बाल विवाह पर रोक – विवाह की आयु निर्धारण का प्रयास
🏛️ 6. फतेहपुर सीकरी – स्थापत्य का चरमोत्कर्ष (1571-1585)
- स्थापना: 1571 ई. – अकबर की नवनिर्मित राजधानी
- प्रमुख इमारतें: बुलंद दरवाजा, जामा मस्जिद ('शान-ए-फतेहपुर'), जोधाबाई महल, दीवान-ए-खास (केंद्रीय स्तंभ), इबादतखाना, बीरबल भवन, तुर्की सुल्ताना का महल
- पंचमहल: बौद्ध विहारों से प्रेरित पाँच मंजिला स्तंभों वाला भवन
🌾 7. प्रशासनिक एवं भू-राजस्व संरचना
📌 मनसबदारी व्यवस्था
- UPSC मूल प्रेरणा: मंगोलों की दशमलव प्रणाली
- ज़ात (Zat): व्यक्तिगत पद, प्रतिष्ठा, वेतन
- सवार (Sawar): घुड़सवार सैनिकों की अनिवार्य संख्या
- भ्रष्टाचार रोकने हेतु: दाग प्रथा (घोड़ों को दागना) और चेहरा प्रणाली (सैनिकों का हुलिया)
📜 दहसाला प्रणाली (1580)
- सूत्रधार: राजा टोडरमल
- UPSC शेरशाह और अकबर के बीच राजस्व प्रशासन की मुख्य कड़ी – राजा टोडरमल
- पिछले 10 वर्षों की औसत उपज के आधार पर कर निर्धारण
- अन्य पद्धतियाँ: जब्ती (माप), कंकूत (अनुमान), नसक
📚 8. अकबर के नवरत्न एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक प्रगति
📖 अबुल फज़ल
- मुख्य इतिहासकार
- रचनाएँ: 'अकबरनामा', 'आईन-ए-अकबरी'
- 1602 में वीर सिंह बुंदेला ने हत्या की
📖 फैजी
- अबुल फज़ल के बड़े भाई
- फारसी के राजकवि
- महाभारत का फारसी अनुवाद – 'रज़्मनामा'
- अब्दुल कादिर बदायूँनी – रामायण का अनुवाद
🎭 बीरबल
- मूल नाम: महेश दास
- वाकपटुता और बुद्धिमानी के लिए प्रसिद्ध
- एकमात्र हिंदू अनुयायी – दीन-ए-इलाही
💰 राजा टोडरमल
- महान भू-राजस्व और वित्त विशेषज्ञ
- दहसाला प्रणाली के सूत्रधार
⚔️ राजा मान सिंह
- मुगलों के प्रधान सेनापति
- हल्दीघाटी युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व
🎵 अब्दुर्रहीम खानखाना
- बैरम खाँ के पुत्र
- कृष्ण-भक्ति और नीतिपरक हिंदी दोहों के लिए प्रसिद्ध
🎶 तानसेन
- मूल नाम: रामतनु पाण्ड्य
- भारत के महानतम संगीत सम्राट
🎨 फकीर अज़ियाउद्दीन
- अकबर के नवरत्न
📜 मुल्ला दो प्याज़ा
- ऐतिहासिक प्रामाणिकता पर मतभेद
🎨 9. चित्रकला, जैन धर्म एवं समकालीन विश्व
🎨 चित्रकला
- प्रमुख चित्रकार: मीर सैयद अली, ख्वाजा अब्दुस्समद, दसवंत, बसावन
- UPSC दसवंत – सबसे प्रखर एवं प्रतिभावान चित्रकार
- शाही कैलीग्राफर मुहम्मद हुसैन – उपाधि: 'जरी कलम'
📿 जैन धर्म एवं वैश्विक परिदृश्य
- जैन आचार्य हरिविजय सूरी – उपाधि: 'जगद्गुरु'
- UPSC ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना (1600) – अकबर के जीवनकाल में, लंदन में
- राल्फ फिच – अकबर के दरबार का भ्रमण करने वाला पहला अंग्रेज यात्री
- ब्रिटेन में रानी एलिजाबेथ प्रथम – समकालीन
📊 वर्षवार त्वरित पुनरावृत्ति मैट्रिक्स
| वर्ष | घटना / सुधार | UPSC परीक्षा फैक्ट |
|---|---|---|
| 1556 | कलानौर में राज्याभिषेक, द्वितीय पानीपत युद्ध | अकबर मात्र 13 वर्ष की आयु में |
| 1562 | आमेर (कछवाहा) के साथ प्रथम वैवाहिक संबंध | राजा भारमल ने स्वेच्छा से अधीनता स्वीकारी |
| 1563 | तीर्थयात्रा कर की समाप्ति | 'सुलह-ए-कुल' की ओर पहला बड़ा कदम |
| 1564 | जजिया कर समाप्त, गोंडवाना विजय | महारानी दुर्गावती के विरुद्ध अभियान |
| 1568-69 | चित्तौड़गढ़ और रणथंभौर विजय | जयमल-पत्ता की वीरता – आगरा किले पर मूर्तियाँ |
| 1571 | फतेहपुर सीकरी की स्थापना | 1571-1585 तक मुगलों की राजधानी |
| 1572-73 | गुजरात विजय | स्मारक: बुलंद दरवाजा |
| 1575 | इबादतखाना का निर्माण | प्रारंभ में केवल मुस्लिम विद्वानों के लिए |
| 1576 | हल्दीघाटी युद्ध, बंगाल-बिहार विजय | राणा प्रताप बनाम मान सिंह, हकीम खाँ सूर |
| 1578 | इबादतखाना सर्वधर्म के लिए खुला | हिंदू, जैन, पारसी, ईसाई का प्रवेश |
| 1579 | 'मजहर' की उद्घोषणा | धार्मिक विवादों का अंतिम अधिकार अकबर को |
| 1580 | दहसाला प्रणाली | राजा टोडरमल – 10 वर्षों का औसत |
| 1582 | दीन-ए-इलाही | एकमात्र हिंदू अनुयायी: बीरबल |
| 1600 | ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना | लंदन में – अकबर का शासन, रानी एलिजाबेथ |
| 1602 | अबुल फज़ल की हत्या | राजकुमार सलीम के इशारे पर वीर सिंह बुंदेला |
📌 निष्कर्ष: जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का शासनकाल (1556-1605) मध्यकालीन भारतीय इतिहास का एक युगांतरकारी संधिकाल था। उसने केवल तलवार के बल पर साम्राज्य विस्तार नहीं किया, बल्कि मनसबदारी व्यवस्था और दहसाला प्रणाली जैसे ठोस प्रशासनिक नवोन्मेषों से साम्राज्य को स्थायित्व दिया। उसकी राजपूत नीति और 'सुलह-ए-कुल' के दर्शन ने बहु-सांस्कृतिक भारतीय समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। अकबर के इस सुदृढ़ साम्राज्यिक ढांचे ने आगामी मुगल शासकों के वैभव के लिए एक सुदृढ़ आधारशिला तैयार की।

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