💎 प्राचीन इतिहास: पाषाण काल (Stone Age)
📸 पाषाण काल | पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण, ताम्रपाषाण | Complete Notes | Image: apnaupsc.in
📌 भूमिका एवं पुरातात्विक वर्गीकरण: भारतीय प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period) मानव सभ्यता के क्रमिक विकास का वह आरंभिक अध्याय है, जहाँ लेखन कला का विकास नहीं हुआ था और मानव पूर्णतः पत्थरों के उपकरणों पर निर्भर था। मानव इतिहास और सभ्यता के विकास का लगभग 99% हिस्सा इसी प्रागैतिहासिक काल के अंतर्गत आता है।
1. पुरापाषाण काल (Palaeolithic) – 25 लाख ई.पू. से 10,000 ई.पू.
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2. मध्यपाषाण काल (Mesolithic) – 10,000 ई.पू. से 6,000 ई.पू.
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3. नवपाषाण काल (Neolithic) – 6,000 ई.पू. से 3,000 ई.पू.
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4. ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic) – पाषाण काल के बाद धातु युग का आरंभ
🦴 1. पुरापाषाण काल (Palaeolithic Age)
यह प्रागैतिहासिक काल का वह समय है जब आदिमानव ने पत्थरों के मूल अनगढ़ औजार बनाना सबसे पहले आरंभ किया था। इस काल का मानव पूर्णतः शिकारी (Hunter) और खाद्य-संग्राहक (Food Gatherer) था।
🏛️ भीमबेटका शैलाश्रय (मध्य प्रदेश)
- UPSC स्थान: रायसेन जिला, मध्य प्रदेश
- UPSC खोज: डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर (1957-58)
- पुरापाषाण व मध्यपाषाण काल के भित्तिचित्र
- UNESCO विश्व धरोहर स्थल (2003)
🦴 हथनोरा (मध्य प्रदेश)
- UPSC स्थान: नर्मदा घाटी
- UPSC खोज: डॉ. अरुण सोनकिया (1982)
- 'होमो इरेक्टस' मानव की खोपड़ी – 70 हजार वर्ष पुरानी
- भारत में प्रागैतिहासिक मानव का प्रथम प्रमाण
🪨 हिनसागी / हुनासागी (कर्नाटक)
- प्रारंभिक पुरापाषाण काल का महत्वपूर्ण स्थल
- उपकरण: चूना पत्थर, बलुआ पत्थर, क्वार्टजाइट
🗺️ अन्य महत्वपूर्ण स्थल
- तमिलनाडु: पल्लवरम, बादमदुरै, अतिरमपक्कम
- छत्तीसगढ़: सिंहावल (रायगढ़)
🏹 2. मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age): माइक्रोलिथ्स का युग
🔍 माइक्रोलिथ्स (Microliths)
- UPSSSC/PET पत्थर के सूक्ष्म औजार
- सामग्री: क्वार्टजाइट, चर्ट, जैस्पर, अगेट
- लंबाई: 1 से 5 इंच
- आकृतियाँ: अर्धचन्द्र, समलम्ब, त्रिभुज
🏛️ बाग़ौर (राजस्थान)
- स्थान: भीलवाड़ा जिला, कोठारी नदी
- UPSC भारत का सबसे बड़ा मध्यपाषाणिक स्थल
- भारत में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य
UPSC भारत में शवों को व्यवस्थित रूप से दफ़नाने की प्रथा की शुरुआत मध्यपाषाण काल से ही मानी जाती है। इसके साक्ष्य सराय नाहर राय (प्रतापगढ़) और महदहा से प्राप्त हुए हैं।
🌾 3. नवपाषाण काल (Neolithic Age): कृषि एवं क्रांतिकारी नवोन्मेष
इतिहासकार गार्डन चाइल्ड ने नवपाषाण काल को 'नवपाषाणिक क्रांति' कहा है, क्योंकि इसी काल में मनुष्य खाद्य-संग्राहक से खाद्य-उत्पादक (कृषक) बना।
🏺 मिट्टी के बर्तन
- नवपाषाण काल में पहली बार मिट्टी के बर्तन
- प्रथम प्रमाण: मेहरगढ़
🪓 सेल्ट (Celt)
- पॉलिशदार पत्थर के औजार
- कुल्हाड़ियों को धारदार बनाया
🏠 गर्त-आवास
- ज़मीन के भीतर गड्ढे बनाकर रहना
- मुख्य स्थल: बुर्जहोम
🏛️ बुर्जहोम (जम्मू-कश्मीर)
- UPSC खोज: डी. टेरा व पीटरसन (1935)
- गर्त-आवास (Pit-Dwellings)
- UPSC मालिक के साथ कुत्ता दफ़नाने का एकमात्र साक्ष्य
- हड्डी के तीराग्र, छिद्र युक्त हार्वेस्टर
🏛️ मेहरगढ़ (बलूचिस्तान, पाकिस्तान)
- स्थान: बोलन नदी के किनारे
- UPSC प्राचीनतम कृषि एवं पशुपालन के साक्ष्य
- जौ, गेहूँ, कपास की खेती
- मिट्टी के बर्तनों का प्रथम प्रमाण
🌾 कोल्डिहवा (उत्तर प्रदेश)
- स्थान: प्रयागराज (इलाहाबाद)
- UPSC 6,000 ई.पू. में धान की खेती
- UPDATED लहुरादेव (संत कबीर नगर) – 8,000 B.C. के साक्ष्य
🐄 महगड़ा (उत्तर प्रदेश)
- स्थान: बेलन नदी घाटी, प्रयागराज
- UPSC पशुबाड़ा – खुर के निशान (Hoof-marks)
- गोलाकार झोपड़ियाँ
- मवेशी, बकरी, भेड़ की हड्डियाँ
🏛️ चिरांद (बिहार)
- स्थान: सारण जिला
- हड्डी के उपकरणों (हिरण के सींग) के लिए प्रसिद्ध
🧱 4. ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic Age): धातुओं का उदय
- मानव द्वारा पहली बार जिस धातु का उपयोग किया गया, वह 'ताँबा' (Copper) था
- काल: लगभग 2000 ई.पू. से 1500 ई.पू.
🏛️ इनामगाँव (महाराष्ट्र)
- स्थान: घोड़ नदी (भीमा नदी की सहायक)
- जोर्वे संस्कृति से जुड़ा
- कृषि और मवेशी पालन
🏛️ जोर्वे संस्कृति
- UPSC/BPSC खोज: एम.एन. देशपांडे
- स्थान: प्रवरा नदी (गोदावरी सहायक), अहमदनगर
- काल: 1400 ई.पू. से 700 ई.पू.
- मुख्य केंद्र: चन्दोली, सोनगाँव, इनामगाँव, नासिक, दायमाबाद
📊 पुरातात्विक तुलनात्मक सारणी (Quick Revision Matrix)
| पुरास्थल | स्थान / नदी | विशेष साक्ष्य |
|---|---|---|
| भीमबेटका | रायसेन, मध्य प्रदेश | डॉ. वी.एस. वाकणकर (1957), UNESCO (2003), शैलचित्र |
| हथनोरा | नर्मदा घाटी, मध्य प्रदेश | डॉ. अरुण सोनकिया (1982), होमो इरेक्टस खोपड़ी |
| बुर्जहोम | जम्मू-कश्मीर | गर्त-आवास, मालिक के साथ कुत्ता दफ़न |
| महगड़ा | बेलन नदी, प्रयागराज | पशुबाड़ा – खुर के निशान (Hoof-marks) |
| मेहरगढ़ | बोलन नदी, बलूचिस्तान | प्राचीनतम कृषि, जौ-गेहूँ, प्रथम मिट्टी के बर्तन |
| कोल्डिहवा | प्रयागराज, उत्तर प्रदेश | 6,000 ई.पू. धान की खेती |
| जोर्वे | प्रवरा नदी, अहमदनगर | एम.एन. देशपांडे, ताम्रपाषाण संस्कृति (1400-700 ई.पू.) |
🎯 परीक्षा के चक्रव्यूह (Exam Traps & Confusion Busters)
| ❌ गलत धारणा (Exam Trap) | ✔ सही ऐतिहासिक तथ्य |
|---|---|
| मनुष्य द्वारा पहली खोजी गई धातु 'काँस्य' थी | गलत! पहली धातु ताँबा (Copper) थी |
| 'माइक्रोलिथ्स' नवपाषाण काल के मिट्टी के बर्तन हैं | गलत! माइक्रोलिथ्स मध्यपाषाण काल के सूक्ष्म पत्थर के औजार |
| कृषि का प्राचीनतम साक्ष्य कोल्डिहवा (गंगा घाटी) से मिलता है | गलत! प्राचीनतम कृषि साक्ष्य मेहरगढ़ से |
| बुर्जहोम ताम्रपाषाणिक हड्डी के औजारों का स्थल था | गलत! बुर्जहोम नवपाषाण काल का गर्त-आवास स्थल |
📌 निष्कर्ष: पाषाण काल (Stone Age) भारतीय इतिहास का आधारभूत स्तंभ है जो आदिमानव के घुमक्कड़ शिकारी जीवन से लेकर एक स्थायी कृषक समाज में बदलने की अद्भुत विकास यात्रा को प्रमाणित करता है। जहाँ भीमबेटका और हथनोरा मानव खोपड़ी और कलात्मक अभिव्यक्ति के शुरुआती चरणों को दर्शाते हैं, वहीं महगड़ा के पशुबाड़े, बुर्जहोम के गर्त-आवास और मेहरगढ़ की कृषि ने हड़प्पा सभ्यता जैसी आगामी नगरीय क्रांतियों के लिए सुदृढ़ पृष्ठभूमि तैयार की।

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