मुगल काल (भाग-3) _ सम्राट जहाँगीर का शासन (1605 ई. – 1627 ई.) _ मास्टर नोट्स

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🕌 मुगल काल (भाग-3): सम्राट जहाँगीर का शासन (1605 ई. – 1627 ई.)

मनसबदारी नवोन्मेष • चित्रकला का स्वर्णयुग • यूरोपीय यात्रियों का आगमन एवं नूरजहाँ जुंटा का प्रभाव
सम्राट जहाँगीर का शासन थंबनेल नोट्स

📸 मुगल काल (भाग-3) | सम्राट जहाँगीर (1605-1627) | नूरजहाँ, मनसबदारी, चित्रकला, यूरोपीय यात्री | Complete Notes | Image: apnaupsc.in

📌 भूमिका एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1605 ई. में सम्राट अकबर की मृत्यु के बाद उसका पुत्र नूरुद्दीन मोहम्मद सलीम 'जहाँगीर' (विश्व विजेता) के नाम से मुग़ल राजसिंहासन पर बैठा। जहाँगीर का शासनकाल अकबर की प्रशासनिक निरंतरता को बनाए रखने के साथ-साथ मुग़ल कूटनीति, यूरोपीय शक्तियों के साथ प्रथम आधिकारिक व्यापारिक संपर्क और कला-संस्कृति के अभूतपूर्व विकास का साक्षी रहा है।

⚔️ 1. जहाँगीर कालीन मनसबदारी व्यवस्था एवं प्रशासनिक नवोन्मेष

अकबर द्वारा स्थापित मनसबदारी व्यवस्था में जहाँगीर ने सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप एक क्रांतिकारी और कूटनीतिक सुधार किया। मनसबदारों को पूर्व की भाँति 'ज़ात' (व्यक्तिगत रैंक) और 'सवार' (रखे जाने वाले घुड़सवारों की संख्या) के पद प्रदान किए जाते थे।

✨ दो-आस्पा एवं सिंह-आस्पा प्रथा (Do-Aspa & Sihn-Aspa)

UPSC इस तकनीकी प्रथा की शुरुआत सर्वप्रथम जहाँगीर ने ही की थी। इसके माध्यम से साम्राज्य पर बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले और मनसबदार के मूल 'ज़ात' पद को बढ़ाए बिना ही उसके 'सवार' पद के सैनिकों की संख्या को दोगुना या तीन गुना किया जा सकता था।

🐎 दो-आस्पा (Do-Aspa)

मनसबदार को अपने 'सवार' पद की निश्चित संख्या के अनुपात में दोगुने घोड़े और घुड़सवार रखने होते थे।

🐎 सिंह-आस्पा (Sihn-Aspa)

मनसबदार को अपने निश्चित सवार पद के अनुपात में तीन गुने घोड़े और घुड़सवार रखने अनिवार्य होते थे।

🤝 2. मुग़ल-मेवाड़ कूटनीति: 'चित्तौड़ की ऐतिहासिक संधि' (1615 ई.)

  • अकबर मेवाड़ को मुग़ल साम्राज्य के अधीन पूरी तरह झुकाने में असफल रहा था।
  • 1615 ई. में जहाँगीर और मेवाड़ के महाराणा प्रताप के पुत्र राणा अमरसिंह के मध्य 'चित्तौड़ की संधि' हस्ताक्षरित हुई।
  • मुग़ल सेना का नेतृत्व: शहजादा खुर्रम (भविष्य के शाहजहाँ)
  • संधि की शर्तें: राणा अमरसिंह को मुग़ल दरबार में उपस्थित होने से छूट, चित्तौड़ का किला मेवाड़ को वापस, परंतु किले की मरम्मत नहीं करने की शर्त।

🇬🇧 3. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का आगमन एवं यूरोपीय यात्री

UPSC जहाँगीर के शासनकाल की सबसे युगांतरकारी घटना व्यापारिक विशेषाधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश राजदूतावास का मुग़ल दरबार में आगमन था।

🧳 विदेशी यात्रियों का भारत आगमन का सही क्रम

1. राल्फ फिच (अकबर काल)

2. विलियम हॉकिन्स (1608-1611 ई.)

3. निकोलस डाउनटन (1614 ई.)

4. सर थॉमस रो (1615-1619 ई.)

5. फ्रांसिस्को पेल्सार्ट (डच पर्यटक - जहाँगीर का उत्तरार्ध)

📌 कैप्टन विलियम हॉकिन्स (1608)

  • ब्रिटिश सम्राट जेम्स प्रथम का आधिकारिक पत्र
  • जहाज: 'हेक्टर' – सूरत के तट पर उतरा
  • UPPSC तुर्की और फारसी भाषा का प्रकांड ज्ञाता
  • उपाधि: 'इंग्लिश खाँ' (English Khan) – 400 का मनसब

📌 सर थॉमस रो (1615)

  • जेम्स प्रथम का दूसरा राजदूत
  • जहाँगीर के पीछे-पीछे अजमेर से मांडू तक यात्रा
  • ब्रिटिश कंपनी के लिए फैक्ट्रियां खोलने के फरमान प्राप्त किए

📌 फ्रांसिस्को पेल्सार्ट (Francisco Pelsaert)

  • डच (हॉलैंड) व्यापारी और पर्यटक
  • पुस्तक: 'रेमोन्स्ट्रेन्टी' (Remonstrantie)
  • जहाँगीर कालीन भारत की सामाजिक, व्यापारिक स्थिति और आम जनता की गरीबी का वास्तविक विवरण

🖼️ 4. मुग़ल चित्रकला का स्वर्णयुग (Golden Age of Painting)

जहाँगीर का काल मुग़ल चित्रकला के इतिहास का चरमोत्कर्ष माना जाता है। जहाँगीर स्वयं चित्रकला का इतना बड़ा पारखी था कि वह केवल देखकर बता सकता था कि किस अंग को किस चित्रकार ने तराशा है।

🎨 अबुल हसन

  • उपाधि: UPSC 'नादिर-उज-ज़मां' (युग का आश्चर्य/शिरोमणि)
  • मानवीय आकृतियों, व्यक्ति-चित्रों (Portraits) के उस्ताद
  • जहाँगीर के सिंहासनारोहण का मुख्य चित्र बनाया

🎨 उस्ताद मंसूर

  • उपाधि: UPSC 'नादिर-उल-अस्त्र' (युग का दुर्लभ रत्न)
  • पशु-पक्षियों और वनस्पतियों के विश्व के सबसे बड़े चित्रकार
  • 'साइबेरिया का सारस' और 'रक्तपुष्प (ट्यूलिप)' – अनमोल धरोहर

🌍 5. भारत के बाहर निर्मित मुग़ल मकबरे

UPSC/BPSC भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में केवल तीन मुग़ल सम्राट ऐसे हैं जिनके मक़बरे/समाधि आधुनिक भारत की भौगोलिक सीमाओं से बाहर स्थित हैं:

  1. बाबर: काबुल (अफगानिस्तान) – बाग-ए-बाबर
  2. जहाँगीर: शाहदरा (लाहौर, पाकिस्तान) – नूरजहाँ द्वारा निर्मित
  3. बहादुर शाह ज़फ़र: रंगून (यांगून, म्यांमार) – ब्रिटिश निर्वासन के बाद

📜 6. राजनीतिक इतिहास के काले पन्ने: अबुल फज़ल की हत्या (1602 ई.)

  • UPSC सलीम (जहाँगीर) के गुप्त कूटनीतिक इशारे पर वीर सिंह देव बुंदेला ने ओरछा के पास अबुल फज़ल की हत्या की
  • राजा बनने के बाद जहाँगीर ने वीर सिंह को भारी जागीर और पुरस्कार से नवाजा

📖 7. तुज़ुक-ए-जहाँगीरी: फारसी आत्मकथा

  • बाबर के बाद दूसरा मुग़ल शासक जिसने आत्मकथा लिखी
  • भाषा: फारसी (Persian) – बाबर ने तुर्की में लिखा था
  • प्रारंभिक 17 वर्ष स्वयं लिखे, बाद में मौतमिद खाँ ने पूरा किया

👑 8. नूरजहाँ गुट (जुंटा दल) एवं स्थापत्य कला

  • 1611 ई. में जहाँगीर ने मेहरून्निसा से विवाह किया – उपाधि: 'नूरजहाँ' (संसार की ज्योति)
  • नूरजहाँ अत्यधिक महत्वाकांक्षी, विदुषी और कूटनीतिज्ञ
  • 1611-1622 तक मुग़ल सत्ता की वास्तविक चाबी 'नूरजहाँ जुंटा' के पास

👥 नूरजहाँ जुंटा के पाँच प्रमुख सदस्य

  1. नूरजहाँ – गुट की मुख्य संचालिका
  2. एतमादुद्दौला / मिर्ज़ा गयास बेग – पिता, वज़ीर (प्रधानमंत्री)
  3. अस्मत बेगम – माता, UPPSC गुलाब की पंखुड़ियों से इत्र निकालने की विधि की आविष्कारक
  4. आसफ खाँ – भाई, सेना और प्रशासन के रणनीतिकार
  5. शहजादा खुर्रम – (भविष्य के शाहजहाँ) – मुख्य सैन्य चेहरा

🏛️ एतमादुद्दौला का मक़बरा एवं 'पित्रा दुरा' तकनीक

  • निर्माता: नूरजहाँ (1626-27 ई.) – अपने पिता के लिए
  • स्थान: आगरा – यमुना नदी के तट पर
  • पूर्ण श्वेत संगमरमर: भारत की पहली ऐसी मुग़ल इमारत
  • UPSC 'पित्रा दुरा / पर्चिनकारी' (Pietra Dura) तकनीक का प्रयोग
  • संगमरमर में अर्ध-कीमती पत्थर (अकीक, जेड, लापिस लाजुली) जड़ना
  • यही तकनीक बाद में ताजमहल का आधार बनी

🏛️ 9. ओरछा स्थापत्य: दतिया का प्रसिद्ध 'गोविंद महल'

  • निर्माता: बुंदेला राजा वीर सिंह देव बुंदेला (1614 ई.)
  • स्थान: दतिया (मध्य प्रदेश)
  • इसे 'जहाँगीर महल' भी कहा जाता है
  • विशेषता: बिना लोहे या लकड़ी के शहतीर (Beam) के – केवल मेहराबों और स्तंभों के संतुलन पर 7 मंजिला ढांचा

⚔️ 10. जहाँगीर के विरुद्ध हुए तीन बड़े ऐतिहासिक विद्रोह

👑 शहजादा खुसरो का विद्रोह (1606)

  • जहाँगीर का ज्येष्ठ पुत्र
  • सिक्खों के 5वें गुरु अर्जुन देव ने शहजादा खुसरो को आशीर्वाद व सहायता दी
  • जहाँगीर ने गुरु अर्जुन देव को मृत्युदंड दिया

👑 शहजादा खुर्रम का विद्रोह (1622)

  • नूरजहाँ के हस्तक्षेप के कारण
  • महाबत खाँ ने विद्रोह कुचला
  • कंधार मुगलों के हाथ से हमेशा के लिए निकल गया

⚔️ महाबत खाँ का सैन्य विद्रोह (1626)

  • नूरजहाँ के बढ़ते हस्तक्षेप के विरोध में
  • झेलम नदी के तट पर जहाँगीर और नूरजहाँ को बंदी बनाया
  • नूरजहाँ की कूटनीति से महाबत खाँ भागा

📊 वर्षवार त्वरित पुनरावृत्ति मैट्रिक्स

वर्षघटना / कार्यUPSC परीक्षा फैक्ट
1602अबुल फज़ल की हत्यासलीम के इशारे पर वीर सिंह देव बुंदेला ने ओरछा के पास हत्या की
1605जहाँगीर का राज्यारोहणअकबर की मृत्यु के बाद आगरा के किले में ताजपोशी
1606खुसरो का विद्रोह, गुरु अर्जुन देव का बलिदानसिक्खों के 5वें गुरु को मृत्युदंड
1608विलियम हॉकिन्स का आगमनतुर्की भाषा में संवाद; 'इंग्लिश खाँ' की उपाधि
1611नूरजहाँ से विवाह, जुंटा दल का उदयराजकाज पर नूरजहाँ गुट का नियंत्रण
1614गोविंद महल का निर्माण (दतिया)वीर सिंह बुंदेला द्वारा बिना लकड़ी-लोहे का 7 मंजिला अजूबा
1615चित्तौड़ की संधि, थॉमस रो का आगमनराणा अमरसिंह की मुग़ल कूटनीतिक अधीनता
1622शहजादा खुर्रम का विद्रोहनूरजहाँ के हस्तक्षेप के विरुद्ध; कंधार मुगलों से निकला
1626एतमादुद्दौला का मक़बरा, महाबत खाँ विद्रोहपूर्ण श्वेत संगमरमर की पहली इमारत; 'पित्रा दुरा' तकनीक
1627जहाँगीर की मृत्युमक़बरा शाहदरा (लाहौर, पाकिस्तान) में

📌 निष्कर्ष: सम्राट जहाँगीर का शासनकाल (1605-1627 ई.) मुग़ल साम्राज्य के विकास और सांस्कृतिक परिपक्वता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। जहाँ उसने 'दो-आस्पा और सिंह-आस्पा' जैसी नवीन व्यवस्था से मनसबदारी को व्यावहारिक बनाया, वहीं मेवाड़ के साथ सम्मानजनक संधि करके राजपूताना में शांति स्थापित की। ब्रिटिश दूतों हॉकिन्स और थॉमस रो के साथ उसका व्यवहार भारत के वैश्विक व्यापारिक भविष्य की आधारशिला बना। चित्रकला के क्षेत्र में अबुल हसन और उस्ताद मंसूर को दिए गए संरक्षण और एतमादुद्दौला के मक़बरे में 'पित्रा दुरा' तकनीक के प्रयोग ने मुग़ल कला को अमर बना दिया, जिसका पूर्ण वैभव आगे चलकर शाहजहाँ के काल में प्रकट हुआ।

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