भारत के 8वें उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के पदेन सभापति और भारत के 9वें राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा का सम्पूर्ण परीक्षा-उपयोगी जीवन परिचय, संवैधानिक भूमिका, महत्वपूर्ण घटनाएँ और MCQs
डॉ. शंकर दयाल शर्मा भारत के उन दुर्लभ राजनेताओं में शामिल थे जिन्होंने शिक्षक, विधिवेत्ता, स्वतंत्रता सेनानी, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति के रूप में सार्वजनिक जीवन के लगभग सभी प्रमुख आयामों को देखा। वे भारत के 8वें उपराष्ट्रपति तथा भारत के 9वें राष्ट्रपति थे।
उनका सार्वजनिक जीवन भारतीय राजनीति के अत्यंत महत्वपूर्ण दौर से जुड़ा रहा। वे उपराष्ट्रपति रहे तो राजीव गांधी, वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर और पी.वी. नरसिंह राव के प्रधानमंत्री काल को देखा। राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल में पंचायती राज और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद उसका कार्यान्वयन, आर्थिक उदारीकरण का दौर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना, बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद की राजनीति, 1996 का त्रिशंकु जनादेश और अनेक प्रधानमंत्री भारत के राजनीतिक इतिहास का हिस्सा बने।
- त्वरित तथ्य
- जन्म, परिवार और प्रारंभिक जीवन
- शिक्षा और अकादमिक उपलब्धियाँ
- शिक्षक और विधिवेत्ता के रूप में जीवन
- राजनीतिक जीवन और मुख्यमंत्री पद
- तीन राज्यों के राज्यपाल
- उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति काल
- राष्ट्रपति काल और प्रमुख घटनाएँ
- समकालीन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति
- उनके काल के प्रमुख संवैधानिक संशोधन
- प्रमुख कानून और संस्थागत विकास
- भारत और विश्व की प्रमुख समकालीन घटनाएँ
- पुरस्कार, पुस्तकें और अन्य तथ्य
- एक पृष्ठ में परीक्षा पुनरावृत्ति
- MCQs और संभावित प्रश्न
1. डॉ. शंकर दयाल शर्मा: एक नजर में
| विषय | तथ्य |
|---|---|
| पूरा नाम | डॉ. शंकर दयाल शर्मा |
| जन्म | 19 अगस्त 1918 |
| जन्मस्थान | भोपाल |
| पिता | पंडित खुशीलाल शर्मा वैद्य शास्त्री |
| जीवनसाथी | विमला शर्मा |
| निधन | 26 दिसंबर 1999 |
| भारत के उपराष्ट्रपति | 8वें उपराष्ट्रपति |
| उपराष्ट्रपति कार्यकाल | 3 सितंबर 1987 – 24 जुलाई 1992 |
| राज्यसभा से संबंध | उपराष्ट्रपति होने के कारण राज्यसभा के पदेन सभापति |
| भारत के राष्ट्रपति | 9वें राष्ट्रपति |
| राष्ट्रपति कार्यकाल | 25 जुलाई 1992 – 25 जुलाई 1997 |
| राष्ट्रपति पद के पूर्ववर्ती | आर. वेंकटरमन |
| राष्ट्रपति पद के उत्तराधिकारी | के. आर. नारायणन |
| मुख्यमंत्री | तत्कालीन भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री |
| राज्यपाल | आंध्र प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र |
| केंद्रीय मंत्री | संचार मंत्री, 1974–1977 |
| विशेष अकादमिक पहचान | कानून के प्रोफेसर और उच्च शिक्षित विधिवेत्ता |
| सम्मान | चक्रवर्ती स्वर्ण पदक (सामाजिक सेवा) |
आर. वेंकटरमन → शंकर दयाल शर्मा → के. आर. नारायणन
इसे याद रखें। यह क्रम राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से संबंधित प्रश्नों में अत्यंत उपयोगी है।
2. जन्म, परिवार और प्रारंभिक जीवन
डॉ. शंकर दयाल शर्मा का जन्म 19 अगस्त 1918 को भोपाल में हुआ था। उनके पिता पंडित खुशीलाल शर्मा वैद्य शास्त्री थे। उनका विवाह विमला शर्मा से हुआ।
उनका जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। वे उच्च शिक्षा, कानून, अध्यापन, लेखन और सार्वजनिक सेवा से गहराई से जुड़े रहे। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों ने उन्हें भारतीय राजनीति के सर्वाधिक विद्वान नेताओं में स्थापित किया।
3. शिक्षा: अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्य
डॉ. शंकर दयाल शर्मा की शिक्षा अत्यंत व्यापक और बहुआयामी थी। उन्होंने भारत और विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन किया।
- स्नातकोत्तर स्तर पर अंग्रेजी साहित्य, हिंदी और संस्कृत का अध्ययन किया।
- एल.एल.एम. की उपाधि प्राप्त की।
- कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से कानून में पीएच.डी. की।
- लंदन विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में डिप्लोमा प्राप्त किया।
- लिंकन्स इन, लंदन से Bar-at-Law से जुड़े।
- हार्वर्ड लॉ स्कूल से उच्च अकादमिक संबंध और अध्ययन किया।
- ज्यूरिख और पेरिस के शैक्षणिक संस्थानों से भी उच्च अध्ययन संबंधी अनुभव प्राप्त किए।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय + कानून में पीएच.डी. + लिंकन्स इन + हार्वर्ड लॉ स्कूल
यह संयोजन डॉ. शंकर दयाल शर्मा की शिक्षा से जुड़े प्रश्नों में बार-बार उपयोगी है।
4. शिक्षक और विधिवेत्ता के रूप में डॉ. शर्मा
राजनीति में पूर्णकालिक रूप से सक्रिय होने से पहले डॉ. शंकर दयाल शर्मा का अकादमिक और कानूनी क्षेत्र से गहरा संबंध था। वे कानून के अध्यापक और प्रोफेसर रहे। उन्होंने भोपाल विश्वविद्यालय में कानून के प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया।
कानून और संविधान की उनकी गहरी समझ बाद में उनके उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति पद के कार्यकाल में विशेष रूप से दिखाई दी। उन्हें संवैधानिक मामलों की समझ, संसदीय प्रक्रिया के ज्ञान और संतुलित निर्णय के लिए जाना जाता था।
5. राजनीतिक जीवन: क्रमबद्ध यात्रा
| काल | पद/भूमिका |
|---|---|
| 1952–1956 | भोपाल विधानसभा के सदस्य |
| 1952–1956 | तत्कालीन भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री |
| 1956–1971 | मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य |
| 1956–1967 | मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री |
| 1971–1977 | लोकसभा सदस्य |
| 1974–1977 | केंद्रीय संचार मंत्री |
| 1980–1984 | लोकसभा सदस्य |
| 1984–1985 | आंध्र प्रदेश के राज्यपाल |
| 1985–1986 | पंजाब के राज्यपाल |
| 1986–1987 | महाराष्ट्र के राज्यपाल |
| 1987–1992 | भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के पदेन सभापति |
| 1992–1997 | भारत के राष्ट्रपति |
भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री
डॉ. शंकर दयाल शर्मा तत्कालीन भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री रहे। ध्यान दें कि यह वर्तमान मध्य प्रदेश के गठन से पहले का राजनीतिक-संवैधानिक संदर्भ है। भोपाल राज्य के भारतीय संघ में एकीकरण और उसके बाद के प्रशासनिक पुनर्गठन की पृष्ठभूमि परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री
मध्य प्रदेश के पुनर्गठन के बाद उन्होंने राज्य सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाला। उनके प्रशासनिक अनुभव में शिक्षा, कानून, लोक निर्माण, उद्योग एवं वाणिज्य, राष्ट्रीय संसाधन तथा अन्य विभाग शामिल रहे।
केंद्रीय संचार मंत्री
डॉ. शर्मा 10 अक्टूबर 1974 से 24 मार्च 1977 तक भारत सरकार में संचार मंत्री रहे। यह तथ्य UPSC, राज्य लोक सेवा आयोगों और सामान्य ज्ञान परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
6. तीन राज्यों के राज्यपाल: महत्वपूर्ण तथ्य
डॉ. शंकर दयाल शर्मा की राजनीतिक यात्रा का एक विशिष्ट पक्ष यह है कि वे तीन अलग-अलग राज्यों के राज्यपाल रहे।
| राज्य | कार्यकाल |
|---|---|
| आंध्र प्रदेश | 29 अगस्त 1984 – 25 नवंबर 1985 |
| पंजाब | 26 नवंबर 1985 – 2 अप्रैल 1986 |
| महाराष्ट्र | 3 अप्रैल 1986 – 2 सितंबर 1987 |
डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने आंध्र प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र—इन तीन राज्यों के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।
7. भारत के 8वें उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के पदेन सभापति
डॉ. शंकर दयाल शर्मा 3 सितंबर 1987 से 24 जुलाई 1992 तक भारत के 8वें उपराष्ट्रपति रहे। भारतीय संविधान के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। अतः इस अवधि में उन्होंने राज्यसभा के सभापति के रूप में भी कार्य किया।
उपराष्ट्रपति काल में राष्ट्रपति कौन थे?
आर. वेंकटरमन 25 जुलाई 1987 से 25 जुलाई 1992 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। इसलिए डॉ. शंकर दयाल शर्मा के उपराष्ट्रपति काल में राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन थे।
उपराष्ट्रपति काल में प्रधानमंत्री कौन-कौन थे?
| प्रधानमंत्री | संबंधित अवधि |
|---|---|
| राजीव गांधी | 31 अक्टूबर 1984 – 2 दिसंबर 1989 |
| वी. पी. सिंह | 2 दिसंबर 1989 – 10 नवंबर 1990 |
| चंद्रशेखर | 10 नवंबर 1990 – 21 जून 1991 |
| पी. वी. नरसिंह राव | 21 जून 1991 से आगे; डॉ. शर्मा के उपराष्ट्रपति कार्यकाल के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री |
उपराष्ट्रपति काल की महत्वपूर्ण राजनीतिक पृष्ठभूमि
- 1989 का लोकसभा चुनाव और गैर-कांग्रेस सरकार का गठन।
- वी.पी. सिंह सरकार और मंडल आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन से संबंधित राष्ट्रीय राजनीति।
- चंद्रशेखर सरकार का संक्षिप्त कार्यकाल।
- 1991 का आम चुनाव और पी.वी. नरसिंह राव का प्रधानमंत्री बनना।
- 1991 की नई आर्थिक नीति और भारतीय अर्थव्यवस्था में उदारीकरण के दौर का आरंभ।
- राजीव गांधी की 1991 में हत्या के बाद उत्पन्न राष्ट्रीय राजनीतिक परिवर्तन।
उपराष्ट्रपति के रूप में डॉ. शंकर दयाल शर्मा → राष्ट्रपति: आर. वेंकटरमन → राज्यसभा सभापति: स्वयं डॉ. शर्मा
8. भारत के 9वें राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल
डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने 25 जुलाई 1992 को भारत के राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया और 25 जुलाई 1997 तक पद पर रहे। वे भारत के 9वें राष्ट्रपति थे।
1992 का राष्ट्रपति चुनाव
1992 के राष्ट्रपति चुनाव में डॉ. शंकर दयाल शर्मा विजयी हुए। चुनाव आयोग के चुनाव अभिलेखों के अनुसार उन्हें 6,75,804 मत-मूल्य प्राप्त हुए और वे 16 जुलाई 1992 को निर्वाचित घोषित किए गए। उन्होंने 25 जुलाई 1992 को राष्ट्रपति पद ग्रहण किया।
8वें राष्ट्रपति — आर. वेंकटरमन
9वें राष्ट्रपति — डॉ. शंकर दयाल शर्मा
10वें राष्ट्रपति — के. आर. नारायणन
राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी संवैधानिक विशेषता
डॉ. शर्मा का राष्ट्रपति कार्यकाल भारत की गठबंधन राजनीति के उभरते दौर का महत्वपूर्ण चरण था। 1996 के आम चुनाव में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई।
1996: त्रिशंकु लोकसभा और अटल बिहारी वाजपेयी को आमंत्रण
1996 के आम चुनाव के बाद किसी दल को बहुमत नहीं मिला। सबसे बड़े दल के नेता के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया और उन्हें लोकसभा में बहुमत सिद्ध करने के लिए कहा गया। अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 मई 1996 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
यह घटना राष्ट्रपति की उस संवैधानिक भूमिका को समझने के लिए महत्वपूर्ण है जो त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में प्रधानमंत्री नियुक्त करने से संबंधित है। बाद में वाजपेयी सरकार लोकसभा में बहुमत सिद्ध नहीं कर सकी और उनका पहला कार्यकाल अत्यंत संक्षिप्त रहा।
9. राष्ट्रपति काल में प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति
| पद | व्यक्ति | स्थिति |
|---|---|---|
| प्रधानमंत्री | पी. वी. नरसिंह राव | डॉ. शर्मा के राष्ट्रपति काल का आरंभिक प्रधानमंत्री; 16 मई 1996 तक |
| प्रधानमंत्री | अटल बिहारी वाजपेयी | 16 मई 1996 – 1 जून 1996 |
| प्रधानमंत्री | एच. डी. देवगौड़ा | 1 जून 1996 – 21 अप्रैल 1997 |
| प्रधानमंत्री | इंद्र कुमार गुजराल | 21 अप्रैल 1997 से; डॉ. शर्मा के राष्ट्रपति कार्यकाल के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री |
| उपराष्ट्रपति | के. आर. नारायणन | 21 अगस्त 1992 – 24 जुलाई 1997 |
एक अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा ट्रिक
डॉ. शंकर दयाल शर्मा के राष्ट्रपति काल में चार प्रधानमंत्रियों का क्रम:
10. डॉ. शंकर दयाल शर्मा के राष्ट्रपति काल के प्रमुख संवैधानिक संशोधन
डॉ. शंकर दयाल शर्मा के कार्यकाल से संबंधित संवैधानिक संशोधनों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण 73वाँ और 74वाँ संविधान संशोधन हैं। दोनों संशोधन 1992 में अधिनियमित हुए थे और 1993 में लागू हुए।
73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992
- पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया।
- संविधान में भाग IX जोड़ा गया।
- अनुच्छेद 243 से 243-O तक प्रावधान किए गए।
- 11वीं अनुसूची जोड़ी गई।
- 11वीं अनुसूची में 29 विषय शामिल हैं।
- पंचायतों के नियमित चुनाव, कार्यकाल और आरक्षण की व्यवस्था को संवैधानिक आधार मिला।
- कम से कम एक-तिहाई सीटों और पदों का महिलाओं के लिए आरक्षण एक महत्वपूर्ण प्रावधान रहा।
- यह संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ।
74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992
- नगरपालिकाओं और शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया।
- संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया।
- अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक प्रावधान किए गए।
- 12वीं अनुसूची जोड़ी गई।
- 12वीं अनुसूची में 18 विषय शामिल हैं।
- यह संशोधन 1 जून 1993 से लागू हुआ।
73वाँ = पंचायत = भाग IX = 11वीं अनुसूची = 29 विषय = 24 अप्रैल 1993
74वाँ = नगरपालिका = भाग IX-A = 12वीं अनुसूची = 18 विषय = 1 जून 1993
75वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1993
किराया, किराया नियंत्रण और मकान मालिक-किरायेदार संबंधी मामलों के निपटारे के लिए किराया न्यायाधिकरणों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों का मार्ग प्रशस्त किया गया।
76वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1994
तमिलनाडु के आरक्षण कानून को नौवीं अनुसूची में रखा गया।
77वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1995
इस संशोधन द्वारा अनुच्छेद 16(4A) जोड़ा गया, जिसने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पदोन्नति में आरक्षण से संबंधित संवैधानिक प्रावधान किया।
78वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1995
कई भूमि सुधार संबंधी कानूनों को नौवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
11. राष्ट्रपति काल के प्रमुख कानून और संस्थागत विकास
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्थापना हुई। NHRC की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को हुई।
यह आयोग जीवन, स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा से संबंधित मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण संस्था है।
ट्राई (TRAI) की स्थापना का कानूनी आधार
Telecom Regulatory Authority of India Act, 1997 के माध्यम से भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के नियमन के लिए TRAI की स्थापना का कानूनी आधार तैयार हुआ।
PESA अधिनियम, 1996
Provisions of the Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) Act, 1996 अर्थात PESA अधिनियम अनुसूचित क्षेत्रों तक पंचायती राज व्यवस्था के विस्तार से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण कानून है।
अन्य महत्वपूर्ण कानून
- Airports Authority of India Act, 1994
- Transplantation of Human Organs Act, 1994
- Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995
- Technology Development Board Act, 1995
- Depositories Act, 1996
- Arbitration and Conciliation Act, 1996
- Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992—उनके राष्ट्रपति पद ग्रहण करने से पहले 1992 में लागू, किंतु आर्थिक सुधारों के व्यापक दौर से संबंधित
12. राष्ट्रपति काल में भारत की प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक घटनाएँ
आर्थिक उदारीकरण का विस्तार
भारत में 1991 में आरंभ आर्थिक सुधारों, उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की प्रक्रिया डॉ. शंकर दयाल शर्मा के राष्ट्रपति काल में आगे बढ़ी। पी.वी. नरसिंह राव प्रधानमंत्री और डॉ. मनमोहन सिंह वित्त मंत्री के रूप में नई आर्थिक नीति के प्रमुख चेहरे थे।
बाबरी मस्जिद विध्वंस और राष्ट्रीय राजनीति
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ। यह घटना डॉ. शर्मा के राष्ट्रपति कार्यकाल के शुरुआती महीनों की सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं में से एक थी और इसके बाद भारतीय राजनीति तथा केंद्र-राज्य संबंधों पर व्यापक प्रभाव पड़ा।
1992 का प्रतिभूति घोटाला
1992 का प्रतिभूति बाजार घोटाला भारत के आर्थिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक रहा। इसके बाद वित्तीय बाजार के नियमन और संस्थागत व्यवस्था पर व्यापक चर्चा हुई।
1996 का आम चुनाव और गठबंधन युग
1996 के आम चुनाव ने भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारों के युग को और मजबूत किया। स्पष्ट बहुमत न मिलने पर राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण हुई।
13. उनके राष्ट्रपति काल में महत्वपूर्ण न्यायिक विकास
- एस. आर. बोम्मई मामला (1994): संघवाद और अनुच्छेद 356 के प्रयोग की न्यायिक समीक्षा से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय।
- विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997): कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से सुरक्षा के लिए विशाखा दिशा-निर्देश।
- डी. के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1996): गिरफ्तारी और हिरासत के दौरान मानवाधिकार संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश।
- एल. चंद्र कुमार मामला: न्यायिक समीक्षा और न्यायाधिकरण व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण संवैधानिक निर्णय।
एस.आर. बोम्मई = अनुच्छेद 356 + संघवाद
विशाखा = कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न
डी.के. बसु = गिरफ्तारी/हिरासत संबंधी दिशा-निर्देश
14. उनके जीवनकाल और राष्ट्रपति काल में विश्व की महत्वपूर्ण घटनाएँ
डॉ. शंकर दयाल शर्मा का सार्वजनिक जीवन 20वीं सदी के कई बड़े वैश्विक परिवर्तनों का साक्षी रहा।
शीत युद्ध का अंत और सोवियत संघ का विघटन
उपराष्ट्रपति काल के अंतिम चरण में सोवियत संघ का विघटन (1991) हुआ। यह शीत युद्ध की समाप्ति और विश्व व्यवस्था के पुनर्गठन की महत्वपूर्ण घटना थी।
विश्व व्यापार संगठन (WTO)
विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना 1 जनवरी 1995 को हुई। भारत के आर्थिक उदारीकरण के दौर में यह घटना अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण थी।
दक्षिण अफ्रीका में लोकतांत्रिक परिवर्तन
1994 में दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के अंत के बाद लोकतांत्रिक चुनाव हुए और नेल्सन मंडेला राष्ट्रपति बने।
व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT)
1996 में CTBT को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनाया। भारत ने इसे स्वीकार नहीं किया। यह भारत की परमाणु नीति से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा विषय है।
15. डॉ. शंकर दयाल शर्मा के काल के अमेरिकी राष्ट्रपति
| अवधि | अमेरिकी राष्ट्रपति | डॉ. शर्मा के जीवन/पद से संबंध |
|---|---|---|
| 1981–1989 | रॉनल्ड रीगन | उपराष्ट्रपति बनने से पूर्व और उपराष्ट्रपति काल के प्रारंभ तक |
| 1989–1993 | जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश | उपराष्ट्रपति काल का उत्तरार्ध और राष्ट्रपति काल का प्रारंभ |
| 1993–2001 | बिल क्लिंटन | डॉ. शर्मा के अधिकांश राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान |
16. पुरस्कार, सम्मान, लेखन और व्यक्तित्व
पुरस्कार
डॉ. शंकर दयाल शर्मा को सामाजिक सेवा के लिए चक्रवर्ती स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ था।
मानद उपाधियाँ
विभिन्न विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद विधि डॉक्टरेट सहित अन्य सम्मान प्रदान किए। उनकी शैक्षणिक प्रतिष्ठा भारत तक सीमित नहीं थी।
प्रमुख पुस्तकों और लेखन से जुड़े तथ्य
- Congress Approach to International Affairs
- Studies in Indo-Soviet Co-operation
- Rule of Law and Role of Police
- Readings in Indo-Soviet Friendship and Co-operation
- Jawaharlal Nehru: The Maker of Modern Commonwealth
- Jawaharlal Nehru Selected Speeches
- Eminent Indians
व्यक्तित्व की विशेषताएँ
- उच्च शिक्षित और विद्वान विधिवेत्ता
- संवैधानिक विषयों की गहरी समझ
- कानून और संसदीय प्रक्रिया के ज्ञाता
- शिक्षा और सार्वजनिक सेवा से गहरा जुड़ाव
- संतुलित और गरिमापूर्ण संवैधानिक व्यवहार
- वक्ता और लेखक के रूप में पहचान
17. अन्य महत्वपूर्ण जीवनियाँ पढ़ें
18. डॉ. शंकर दयाल शर्मा: एक पृष्ठ में सम्पूर्ण रिवीजन
19. परीक्षा-उपयोगी बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
(A) 7वें
(B) 8वें
(C) 9वें
(D) 10वें
(A) 19 अगस्त 1918
(B) 15 अगस्त 1919
(C) 19 अगस्त 1920
(D) 26 जनवरी 1918
(A) 6वें
(B) 7वें
(C) 8वें
(D) 9वें
(A) 1984–1989
(B) 1987–1992
(C) 1990–1995
(D) 1992–1997
(A) ज्ञानी जैल सिंह
(B) आर. वेंकटरमन
(C) के. आर. नारायणन
(D) नीलम संजीव रेड्डी
(A) ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
(B) के. आर. नारायणन
(C) प्रतिभा पाटिल
(D) आर. वेंकटरमन
(A) बिहार, उत्तर प्रदेश और पंजाब
(B) आंध्र प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र
(C) महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान
(D) पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश
(A) मध्य प्रदेश
(B) भोपाल राज्य
(C) राजस्थान
(D) आंध्र प्रदेश
(A) रक्षा
(B) विदेश
(C) संचार
(D) गृह
(A) आर. वेंकटरमन
(B) डॉ. शंकर दयाल शर्मा
(C) के. आर. नारायणन
(D) ज्ञानी जैल सिंह
(A) एच.डी. देवगौड़ा
(B) पी.वी. नरसिंह राव
(C) अटल बिहारी वाजपेयी
(D) आई.के. गुजराल
(A) नगरपालिकाएँ
(B) पंचायतें
(C) शिक्षा का अधिकार
(D) GST
(A) पंचायतें
(B) नगरपालिकाएँ
(C) सहकारी समितियाँ
(D) निर्वाचन आयोग
(A) भाग VIII
(B) भाग IX
(C) भाग IX-A
(D) भाग X
(A) भाग IX
(B) भाग IX-A
(C) भाग X
(D) भाग XI
(A) 1991
(B) 1992
(C) 1993
(D) 1995
(A) मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
(B) नागरिक अधिकार अधिनियम, 1955
(C) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
(D) लोकपाल अधिनियम
(A) 1993
(B) 1994
(C) 1996
(D) 1998
(A) आर. वेंकटरमन
(B) के. आर. नारायणन
(C) कृष्णकांत
(D) एम. हिदायतुल्लाह
(A) पी.वी. नरसिंह राव
(B) अटल बिहारी वाजपेयी
(C) एच.डी. देवगौड़ा
(D) राजीव गांधी
(A) रोनाल्ड रीगन
(B) जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश
(C) बिल क्लिंटन
(D) जॉर्ज डब्ल्यू. बुश
(A) 1992
(B) 1994
(C) 1996
(D) 1997
(A) शिक्षा का अधिकार
(B) अनुच्छेद 356 और संघवाद
(C) पर्यावरण संरक्षण
(D) निर्वाचन सुधार
(A) ऑक्सफोर्ड से अर्थशास्त्र में पीएच.डी.
(B) कैम्ब्रिज से कानून में पीएच.डी.
(C) IIT से इंजीनियरिंग
(D) IIM से MBA
(A) केवल सैन्य अधिकारी
(B) केवल वैज्ञानिक
(C) विधिवेत्ता, शिक्षक और राजनेता
(D) केवल अर्थशास्त्री
20. निष्कर्ष
डॉ. शंकर दयाल शर्मा का जीवन भारतीय लोकतंत्र में शिक्षा, कानून, राजनीति और संवैधानिक संस्थाओं के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का उदाहरण है। भोपाल के राजनीतिक आंदोलन से लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, उपराष्ट्रपति और अंततः भारत के राष्ट्रपति बनने तक की उनकी यात्रा भारतीय सार्वजनिक जीवन की एक असाधारण कहानी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उन्हें केवल भारत के 9वें राष्ट्रपति के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है।

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