महात्मा गांधी एवं भारत में गांधी युग (1915–1948): जीवन, सत्याग्रह, आंदोलन और महत्वपूर्ण तथ्य | UPSC, UPPSC, BPSC
महात्मा गांधी और गांधी युग (1915–1948) आधुनिक भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है। UPSC, UPPSC, BPSC, UPSSSC, SSC तथा अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में गांधीजी से जुड़े सत्याग्रह, अहिंसा, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, चंपारण, खेड़ा, अहमदाबाद मिल हड़ताल, गांधी-इरविन समझौता, गोलमेज सम्मेलन, रचनात्मक कार्यक्रम और गांधीवादी विचार से प्रश्न पूछे जाते हैं।
- महात्मा गांधी का जीवन परिचय
- दक्षिण अफ्रीका और गांधीजी का राजनीतिक निर्माण
- भारत में गांधी युग की शुरुआत
- चंपारण, अहमदाबाद और खेड़ा
- रॉलेट सत्याग्रह और जलियांवाला बाग
- असहयोग आंदोलन
- सविनय अवज्ञा आंदोलन और दांडी मार्च
- गांधी-इरविन समझौता और गोलमेज सम्मेलन
- पूना समझौता और सामाजिक सुधार
- भारत छोड़ो आंदोलन 1942
- गांधीजी के प्रमुख विचार
- पुस्तकें, पत्र-पत्रिकाएँ और संस्थाएँ
- गांधी युग की महत्वपूर्ण कालक्रम तालिका
- UPSC/UPPSC/BPSC के लिए कठिन तथ्य
- पूर्व परीक्षा प्रश्न एवं Expected MCQs
1. महात्मा गांधी: जीवन परिचय
महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर रियासत के दीवान रहे, जबकि उनकी माता पुतलीबाई धार्मिक प्रवृत्ति की थीं।
- पूरा नाम — मोहनदास करमचंद गांधी
- जन्म — 2 अक्टूबर 1869
- जन्मस्थान — पोरबंदर, गुजरात
- पिता — करमचंद गांधी
- माता — पुतलीबाई
- पत्नी — कस्तूरबा गांधी
- मृत्यु — 30 जनवरी 1948, नई दिल्ली
गांधीजी ने कानून की शिक्षा के लिए इंग्लैंड की यात्रा की और बाद में बैरिस्टर बने। 1893 में वे एक कानूनी मामले के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए। यहीं से उनके राजनीतिक एवं सामाजिक संघर्ष का नया चरण प्रारंभ हुआ।
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2. दक्षिण अफ्रीका: गांधीजी के राजनीतिक जीवन की प्रयोगशाला
दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव ने गांधीजी के राजनीतिक विचारों को गहराई से प्रभावित किया। 1893 से 1914 तक का दक्षिण अफ्रीकी अनुभव उनके सत्याग्रह के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
🔹 पीटरमैरिट्जबर्ग की घटना
दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी को प्रथम श्रेणी का टिकट होने के बावजूद नस्लीय भेदभाव के कारण ट्रेन के डिब्बे से बाहर कर दिया गया। यह घटना उनके जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ों में गिनी जाती है।
🔹 नटाल इंडियन कांग्रेस
गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय को संगठित करने के लिए Natal Indian Congress (1894) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🔹 सत्याग्रह का विकास
दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी ने अन्यायपूर्ण कानूनों के विरुद्ध सत्य, अहिंसा, आत्मबल और स्वैच्छिक कष्ट पर आधारित संघर्ष की पद्धति विकसित की। यही आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक तकनीक बनी।
3. 1915: भारत वापसी और गांधी युग की शुरुआत
गांधीजी 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। भारत लौटने के बाद उन्होंने तत्काल किसी बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व करने के बजाय देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों को समझने के लिए व्यापक यात्राएँ कीं।
गांधीजी के भारत लौटने के बाद गोपाल कृष्ण गोखले उनके प्रमुख राजनीतिक मार्गदर्शकों में रहे। गांधीजी ने भारतीय राजनीति में प्रवेश से पहले देश को समझने पर जोर दिया।
🔹 कोचरब आश्रम
गांधीजी ने भारत में अपना पहला आश्रम 25 मई 1915 को अहमदाबाद के कोचरब में स्थापित किया। बाद में इसे 17 जून 1917 को साबरमती के तट पर स्थानांतरित किया गया।
4. गांधीजी के प्रारंभिक सत्याग्रह: चंपारण, अहमदाबाद और खेड़ा
| आंदोलन | वर्ष | मुख्य मुद्दा | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|---|
| चंपारण सत्याग्रह | 1917 | नील की खेती | तिनकठिया प्रथा; राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी को चंपारण आने के लिए प्रेरित किया। |
| अहमदाबाद मिल हड़ताल | 1918 | मजदूरों की मजदूरी | गांधीजी ने मजदूरों के समर्थन में उपवास किया। |
| खेड़ा सत्याग्रह | 1918 | राजस्व में राहत | फसल खराबी के बीच लगान में राहत की मांग; सरदार पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका। |
🔸 चंपारण सत्याग्रह — 1917
चंपारण सत्याग्रह गांधीजी का भारत में पहला प्रमुख सत्याग्रह माना जाता है। चंपारण के किसानों को नील की खेती के लिए बाध्य किया जाता था। गांधीजी को राजकुमार शुक्ल ने चंपारण आने के लिए प्रेरित किया।
- चंपारण — बिहार
- मुख्य समस्या — नील की खेती
- तिनकठिया प्रथा — किसानों पर नील की खेती का दबाव
- गांधीजी को चंपारण लाने में प्रमुख भूमिका — राजकुमार शुक्ल
- महत्वपूर्ण सहयोगियों में — राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा आदि
🔸 अहमदाबाद मिल हड़ताल — 1918
अहमदाबाद में मिल मजदूरों और मिल मालिकों के बीच मजदूरी से संबंधित विवाद हुआ। गांधीजी ने मजदूरों के पक्ष में हस्तक्षेप किया और उपवास का सहारा लिया।
🔸 खेड़ा सत्याग्रह — 1918
खेड़ा में फसल खराब होने के कारण किसानों ने भू-राजस्व में राहत की मांग की। गांधीजी के साथ वल्लभभाई पटेल और अन्य स्थानीय कार्यकर्ताओं ने आंदोलन को संगठित किया।
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5. रॉलेट सत्याग्रह, जलियांवाला बाग और गांधीजी की राजनीति में बड़ा मोड़
रॉलेट एक्ट, 1919 के विरोध में गांधीजी ने सत्याग्रह का आह्वान किया। 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल/सत्याग्रह आयोजित किया गया।
इसके बाद 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर के आदेश पर गोलीबारी हुई। इस घटना ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को गहराई से प्रभावित किया।
6. असहयोग आंदोलन (1920–1922)
गांधीजी ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध असहयोग आंदोलन को व्यापक जनआंदोलन का रूप दिया। इसके पीछे रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड तथा खिलाफत प्रश्न जैसे कारक महत्वपूर्ण थे।
मुख्य कार्यक्रम
- सरकारी उपाधियों का त्याग
- सरकारी स्कूल-कॉलेजों का बहिष्कार
- विधिक संस्थाओं का बहिष्कार
- विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार
- खादी एवं स्वदेशी का प्रचार
- राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा
चौरी-चौरा की घटना में पुलिसकर्मियों की मृत्यु हुई। गांधीजी का मानना था कि आंदोलन का आधार अहिंसा है और जनसमुदाय अभी अहिंसक अनुशासन के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है।
7. गांधीजी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
गांधीजी ने कांग्रेस को एक अपेक्षाकृत सीमित राजनीतिक मंच से व्यापक जनभागीदारी वाले राष्ट्रीय आंदोलन के माध्यम में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसान, मजदूर, महिलाएँ, विद्यार्थी और विभिन्न सामाजिक समूह राष्ट्रीय आंदोलन से तेजी से जुड़े।
- स्थान — बेलगाम (वर्तमान बेलगावी, कर्नाटक)
- अधिवेशन — कांग्रेस का 39वाँ अधिवेशन
- वर्ष — 1924
- अध्यक्ष — महात्मा गांधी
- यह गांधीजी का एकमात्र कांग्रेस अध्यक्षीय अधिवेशन था।
8. सविनय अवज्ञा आंदोलन और दांडी मार्च (1930)
पूर्ण स्वराज्य की घोषणा के बाद कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सविनय अवज्ञा आंदोलन का मार्ग अपनाया। गांधीजी ने इस आंदोलन के आरंभ के लिए नमक कानून को चुना।
दांडी मार्च — महत्वपूर्ण तथ्य
- आरंभ — 12 मार्च 1930
- स्थान — साबरमती आश्रम
- गंतव्य — दांडी, गुजरात
- प्रारंभिक दल — गांधीजी सहित 78 सत्याग्रही
- नमक कानून का उल्लंघन — 6 अप्रैल 1930
- आंदोलन — सविनय अवज्ञा आंदोलन
दांडी मार्च केवल “नमक मार्च” नहीं था। नमक को इसलिए चुना गया क्योंकि नमक अमीर-गरीब सभी की दैनिक आवश्यकता था और नमक कर औपनिवेशिक आर्थिक नियंत्रण का प्रतीक बन गया था।
9. गांधी-इरविन समझौता और गोलमेज सम्मेलन
5 मार्च 1931 को गांधी-इरविन समझौते की घोषणा हुई। इसके बाद गांधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया।
| घटना | वर्ष | गांधीजी की भूमिका |
|---|---|---|
| प्रथम गोलमेज सम्मेलन | 1930 | कांग्रेस ने भाग नहीं लिया |
| गांधी-इरविन समझौता | 1931 | गांधीजी और लॉर्ड इरविन के बीच समझौता |
| द्वितीय गोलमेज सम्मेलन | 1931 | गांधीजी ने कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया |
| तृतीय गोलमेज सम्मेलन | 1932 | कांग्रेस ने भाग नहीं लिया |
10. पूना समझौता, अस्पृश्यता विरोध और सामाजिक सुधार
1932 में ब्रिटिश सरकार द्वारा घोषित कम्यूनल अवॉर्ड में दलित वर्गों के लिए अलग निर्वाचन मंडल का प्रावधान किया गया। गांधीजी ने इसका विरोध किया और यरवदा जेल में उपवास किया। इसके बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर और गांधीजी से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच समझौते से पूना समझौता, 1932 हुआ।
गांधीजी ने अस्पृश्यता के विरुद्ध अभियान चलाया और सामाजिक सुधार को राष्ट्रीय आंदोलन के रचनात्मक कार्यक्रम से जोड़ा।
11. गांधीजी के प्रमुख विचार एवं दर्शन
| विचार | सरल अर्थ | परीक्षा में महत्व |
|---|---|---|
| सत्य | सत्य को जीवन और राजनीति का आधार मानना | सत्याग्रह की मूल अवधारणा |
| अहिंसा | हिंसा के बजाय नैतिक शक्ति का प्रयोग | गांधीवादी संघर्ष पद्धति का आधार |
| सत्याग्रह | सत्य के प्रति आग्रह और अन्याय के विरुद्ध आत्मबल | निष्क्रिय प्रतिरोध से अलग अवधारणा |
| स्वदेशी | स्थानीय उत्पादन और वस्तुओं को बढ़ावा | खादी एवं आर्थिक राष्ट्रवाद |
| सर्वोदय | सभी के कल्याण की अवधारणा | गांधीवादी सामाजिक दर्शन |
| ट्रस्टीशिप | संपत्ति रखने वालों को समाज के हित में उसके न्यासी के रूप में देखना | गांधी का आर्थिक दर्शन |
| ग्राम स्वराज | स्वावलंबी एवं विकेंद्रीकृत ग्राम व्यवस्था | राजनीतिक एवं आर्थिक विचार |
12. गांधीजी की प्रमुख पुस्तकें
- हिंद स्वराज (Indian Home Rule) — 1909
- सत्याग्रह इन साउथ अफ्रीका
- मेरे सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा
- रचनात्मक कार्यक्रम: उसका अर्थ और स्थान
- Key to Health
गांधीजी ने Hind Swaraj को 1909 में लिखा। यह पुस्तक आधुनिक सभ्यता, स्वराज, औद्योगीकरण, नैतिकता और औपनिवेशिक व्यवस्था पर उनके प्रारंभिक विचारों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
13. गांधीजी की प्रमुख पत्र-पत्रिकाएँ
| पत्र/पत्रिका | महत्व |
|---|---|
| Indian Opinion | दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी के विचारों और भारतीय समुदाय के संघर्ष का महत्वपूर्ण माध्यम। |
| Young India | राष्ट्रीय आंदोलन, राजनीति और गांधीवादी विचारों के प्रचार का प्रमुख माध्यम। |
| Navajivan | गांधीजी से जुड़ी महत्वपूर्ण पत्रिका; 1919 में इसके प्रकाशन का महत्वपूर्ण चरण आया। |
| Harijan | अस्पृश्यता, सामाजिक सुधार और गांधीवादी रचनात्मक कार्यक्रम से संबंधित प्रमुख पत्र। |
👉 सर सी. वी. रमन: जीवन, खोज, नोबेल पुरस्कार एवं महत्वपूर्ण तथ्य
👉 डॉ. विक्रम साराभाई: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम, ISRO, PRL एवं महत्वपूर्ण तथ्य
14. भारत छोड़ो आंदोलन — 1942
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार की नीतियों, क्रिप्स मिशन की विफलता और भारत में तत्काल स्वतंत्रता की बढ़ती मांग के बीच कांग्रेस ने भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया।
- वर्ष — 1942
- भारत छोड़ो प्रस्ताव — 8 अगस्त 1942
- स्थान — बंबई
- प्रमुख नारा — “करो या मरो” (Do or Die)
- 9 अगस्त 1942 को गांधीजी सहित शीर्ष कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी
- आंदोलन का नेतृत्व कई स्थानों पर स्थानीय एवं भूमिगत नेताओं ने संभाला।
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अरुणा आसफ अली, जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, उषा मेहता जैसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही।
15. गांधीजी का अंतिम चरण और स्वतंत्रता
1946–47 में गांधीजी का प्रमुख ध्यान सांप्रदायिक हिंसा को रोकने और हिंदू-मुस्लिम एकता स्थापित करने पर था। उन्होंने बंगाल और बिहार सहित कई क्षेत्रों में शांति यात्राएँ और उपवास किए।
भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली, लेकिन गांधीजी दिल्ली में स्वतंत्रता समारोह के औपचारिक उत्सव से दूर सांप्रदायिक शांति के प्रयासों में लगे रहे।
30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली स्थित बिरला हाउस (वर्तमान गांधी स्मृति) में प्रार्थना सभा के दौरान गांधीजी की हत्या कर दी गई।
30 जनवरी 1948 — नई दिल्ली।
स्थान — बिरला हाउस, वर्तमान गांधी स्मृति, 5 तीस जनवरी मार्ग।
16. गांधी युग: सबसे महत्वपूर्ण कालक्रम
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1893 | गांधीजी दक्षिण अफ्रीका गए |
| 1894 | Natal Indian Congress से जुड़ा संगठनात्मक कार्य |
| 1906 | दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह के विकास का महत्वपूर्ण चरण |
| 1909 | Hind Swaraj |
| 1910 | Tolstoy Farm |
| 1915 | भारत वापसी; कोचरब आश्रम |
| 1917 | चंपारण सत्याग्रह |
| 1918 | अहमदाबाद मिल हड़ताल एवं खेड़ा सत्याग्रह |
| 1919 | रॉलेट सत्याग्रह; जलियांवाला बाग |
| 1920 | असहयोग आंदोलन |
| 1922 | चौरी-चौरा के बाद असहयोग आंदोलन वापस |
| 1924 | बेलगाम कांग्रेस अधिवेशन; गांधीजी अध्यक्ष |
| 1930 | दांडी मार्च एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन |
| 1931 | गांधी-इरविन समझौता; द्वितीय गोलमेज सम्मेलन |
| 1932 | पूना समझौता |
| 1942 | भारत छोड़ो आंदोलन |
| 1947 | भारत स्वतंत्र |
| 1948 | गांधीजी की हत्या |
17. UPSC / UPPSC / BPSC के लिए 25 अति-महत्वपूर्ण कठिन तथ्य
- गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
- जन्म — 2 अक्टूबर 1869, पोरबंदर।
- भारत वापसी — 9 जनवरी 1915।
- भारत में पहला प्रमुख गांधीवादी सत्याग्रह — चंपारण, 1917।
- चंपारण में प्रमुख समस्या — नील की खेती।
- गांधीजी को चंपारण आने के लिए प्रेरित करने वाले — राजकुमार शुक्ल।
- खेड़ा आंदोलन — 1918।
- अहमदाबाद मिल हड़ताल — 1918।
- रॉलेट सत्याग्रह — 1919।
- जलियांवाला बाग — 13 अप्रैल 1919।
- असहयोग आंदोलन — 1920–1922।
- चौरी-चौरा — 4 फरवरी 1922।
- गांधीजी का एकमात्र कांग्रेस अध्यक्षीय अधिवेशन — बेलगाम, 1924।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रतीकात्मक आरंभ — दांडी मार्च, 1930।
- दांडी मार्च आरंभ — 12 मार्च 1930।
- दांडी में नमक कानून का उल्लंघन — 6 अप्रैल 1930।
- गांधी-इरविन समझौता — 5 मार्च 1931।
- द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में गांधीजी ने कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया।
- पूना समझौता — 1932।
- भारत छोड़ो प्रस्ताव — 8 अगस्त 1942।
- भारत छोड़ो आंदोलन का प्रसिद्ध गांधीवादी आह्वान — करो या मरो।
- गांधीजी की मृत्यु — 30 जनवरी 1948।
- गांधीजी की हत्या का स्थान — बिरला हाउस, नई दिल्ली।
- गांधीजी का राजनीतिक दर्शन — सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह पर आधारित।
- गांधीजी का आर्थिक-सामाजिक दृष्टिकोण — स्वदेशी, खादी, ग्राम स्वराज, ट्रस्टीशिप और सर्वोदय जैसे विचारों से जुड़ा।
18. पूर्व परीक्षा प्रश्न + UPSC Pattern Expected MCQs
गांधी युग से UPSC तथा UPSC की अन्य परीक्षाओं में बार-बार प्रश्न पूछे गए हैं। नीचे वास्तविक/पूर्व परीक्षा के उदाहरण और उसी स्तर के नए Expected Questions दिए गए हैं।
“Sedition has become my religion” गांधीजी के किस प्रसंग से संबंधित प्रसिद्ध कथन के रूप में पूछा गया था?
A. चंपारण सत्याग्रह
B. दांडी में नमक कानून का उल्लंघन
C. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
D. भारत छोड़ो आंदोलन
8 अगस्त 1942 के संदर्भ में सही कथन कौन-सा है?
A. AICC ने भारत छोड़ो प्रस्ताव स्वीकार किया
B. वायसराय की कार्यकारिणी का विस्तार किया गया
C. कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने सात प्रांतों से इस्तीफा दिया
D. क्रिप्स ने युद्ध के बाद पूर्ण डोमिनियन स्टेटस का प्रस्ताव रखा
चंपारण सत्याग्रह के संबंध में सही कथन कौन-सा है?
A. गांधीजी ने भारत में पहली बार भूख हड़ताल चंपारण में की
B. राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी से चंपारण के किसानों की समस्या देखने का अनुरोध किया
C. दोनों
D. कोई नहीं
गांधीजी को चंपारण आने के लिए किस व्यक्ति ने विशेष रूप से प्रेरित किया?
A. राजेंद्र प्रसाद
B. राजकुमार शुक्ल
C. वल्लभभाई पटेल
D. ब्रजकिशोर प्रसाद
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
A. चंपारण — मजदूर आंदोलन
B. खेड़ा — भू-राजस्व राहत
C. अहमदाबाद — नील की खेती
D. दांडी — तिनकठिया प्रथा
गांधीजी का एकमात्र कांग्रेस अध्यक्षीय अधिवेशन किस स्थान पर हुआ?
A. लखनऊ
B. बेलगाम
C. लाहौर
D. कराची
दांडी मार्च का संबंध मुख्यतः किस कानून के उल्लंघन से था?
A. वन कानून
B. नमक कानून
C. प्रेस कानून
D. रॉलेट एक्ट
गांधी-इरविन समझौता किस वर्ष हुआ?
A. 1929
B. 1930
C. 1931
D. 1932
निम्न में से कौन गांधीवादी आर्थिक विचार से सर्वाधिक संबंधित है?
A. ट्रस्टीशिप
B. औपनिवेशिक मुक्त व्यापार
C. भारी केंद्रीकरण
D. साम्राज्यवादी संरक्षणवाद
भारत छोड़ो प्रस्ताव 1942 में किस संस्था ने स्वीकार किया?
A. मुस्लिम लीग परिषद
B. AICC
C. वायसराय की कार्यकारिणी
D. केंद्रीय विधान सभा
निम्नलिखित में सही कालक्रम चुनिए:
1. खेड़ा सत्याग्रह
2. चंपारण सत्याग्रह
3. रॉलेट सत्याग्रह
4. असहयोग आंदोलन
A. 1-2-3-4
B. 2-1-3-4
C. 2-3-1-4
D. 3-2-1-4
निम्न में से कौन-सी पत्रिका गांधीजी के सामाजिक सुधार अभियान से विशेष रूप से जुड़ी थी?
A. Harijan
B. Kesari
C. Al-Hilal
D. Bande Mataram
गांधीवादी सत्याग्रह को निष्क्रिय प्रतिरोध से अलग करने वाली प्रमुख विशेषता क्या थी?
A. हिंसक प्रतिशोध
B. सत्य एवं अहिंसा पर आधारित सक्रिय नैतिक संघर्ष
C. केवल संवैधानिक याचिका
D. राजनीतिक सत्ता का सैन्य अधिग्रहण
19. UPSC Mains के लिए गांधी युग से संभावित प्रश्न
👉 मंगल पांडे और चित्तू पांडे — जीवन एवं स्वतंत्रता आंदोलन
👉 खुदीराम बोस — जीवनी एवं मुजफ्फरपुर बम कांड
👉 अहिल्याबाई होलकर — जीवन, इतिहास एवं योगदान
👉 सी. वी. रमन — जीवन, विज्ञान एवं नोबेल पुरस्कार
👉 विक्रम साराभाई — ISRO एवं भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम
20. गांधी युग — One Minute Revision
- 1869 — गांधीजी का जन्म
- 1893 — दक्षिण अफ्रीका
- 1909 — Hind Swaraj
- 1915 — भारत वापसी
- 1917 — चंपारण
- 1918 — अहमदाबाद + खेड़ा
- 1919 — रॉलेट + जलियांवाला बाग
- 1920 — असहयोग आंदोलन
- 1922 — चौरी-चौरा और असहयोग वापसी
- 1924 — बेलगाम, गांधीजी का एकमात्र कांग्रेस अध्यक्षीय अधिवेशन
- 1930 — दांडी मार्च + सविनय अवज्ञा
- 1931 — गांधी-इरविन समझौता + द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
- 1932 — पूना समझौता
- 1942 — भारत छोड़ो आंदोलन
- 1947 — भारत स्वतंत्र
- 1948 — गांधीजी की हत्या
महात्मा गांधी का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान केवल कुछ आंदोलनों तक सीमित नहीं था। उन्होंने सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, स्वदेशी, खादी, ग्राम स्वराज और रचनात्मक कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक सामाजिक आधार देने का प्रयास किया। UPSC, UPPSC, BPSC, UPSSSC और SSC जैसी परीक्षाओं के लिए गांधी युग को केवल घटनाओं की सूची के रूप में नहीं बल्कि “कारण → रणनीति → जनभागीदारी → परिणाम → ऐतिहासिक महत्व” के रूप में पढ़ना अधिक उपयोगी है।
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