![]() |
| ICAR ने अरहर (Asha) का भारत का पहला पूर्ण Annotated T2T Reference Genome विकसित किया। |
Current Affairs | कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी | GS Paper-3 | UPSC, UPPSC, BPSC, UPSSSC, SSC
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अगस्त 2026 में कृषि जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ICAR ने अरहर/तूर (Pigeonpea – Cajanus cajan) की ‘आशा’ (Asha) किस्म का भारत का पहला पूर्णतः Annotated Telomere-to-Telomere (T2T) Reference Genome विकसित किया है।
यह उपलब्धि केवल जीनोम अनुक्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भविष्य में जलवायु-सहिष्णु, अधिक उपज देने वाली, रोग-प्रतिरोधी तथा पोषण की दृष्टि से बेहतर अरहर की किस्में विकसित करने में मदद मिल सकती है।
अरहर के जीनोम से जुड़ी नवीनतम उपलब्धि
| तथ्य | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| फसल | अरहर / तूर / Pigeonpea |
| वैज्ञानिक नाम | Cajanus cajan L. Millsp. |
| किस्म | ‘आशा’ (Asha) |
| जीनोम का प्रकार | पूर्णतः Annotated Telomere-to-Telomere (T2T) Reference Genome |
| DNA | 752.65 मिलियन Base Pairs |
| गुणसूत्र | 11 |
| Centromeres | 11 |
| Telomeres | 22 |
| पहचाने गए Genes | 36,557 |
| mRNAs / Coding Sequences | 48,008 |
| Transcriptome Read Alignment | 99.9% से अधिक |
| Genome Assembly | NIPB_CcT2T_4 |
| NCBI Accession | GCF_000230855.1 |
| Genome Release | 20 अप्रैल 2026 |
Telomere-to-Telomere (T2T) Genome क्या है?
T2T यानी Telomere-to-Telomere का अर्थ है ऐसा जीनोम अनुक्रमण जिसमें गुणसूत्र के एक सिरे (Telomere) से दूसरे सिरे तक DNA sequence को अधिकतम पूर्णता के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
साधारण अथवा पुराने Genome Assemblies में DNA के कुछ कठिन हिस्से छूट सकते थे। T2T Assembly का उद्देश्य इन gap तथा जटिल क्षेत्रों को भी अधिक पूर्णता से शामिल करना है। इसलिए यह किसी फसल के आनुवंशिक संगठन को समझने और बेहतर breeding programmes के लिए अत्यंत उपयोगी संसाधन है।
परीक्षा नोट: T2T Genome का संबंध केवल DNA की मात्रा से नहीं, बल्कि Genome Assembly की completeness और chromosome-level representation से है।
अरहर की ‘आशा’ किस्म का महत्व
ICAR–National Institute for Plant Biotechnology (ICAR-NIPB), नई दिल्ली के वैज्ञानिकों ने अरहर के जीनोमिक अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वर्ष 2011 में ICAR-NIPB ने अरहर की ‘आशा’ किस्म का दुनिया का पहला Draft Genome प्रकाशित किया था। यह भारत में पूरी तरह से sequence किया गया पहला crop genome भी था। इसके बाद वर्ष 2017 में Draft Genome का improved version प्रकाशित किया गया।
2026 का T2T Genome इसी शोध यात्रा का अगला महत्वपूर्ण चरण है।
यह उपलब्धि कृषि के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
- जलवायु-सहिष्णु अरहर की नई किस्में विकसित करने में सहायता।
- अधिक उपज देने वाली किस्मों के विकास में तेजी।
- रोग एवं कीट प्रतिरोधी किस्मों की पहचान में सहायता।
- पोषण संबंधी बेहतर गुणों वाली किस्मों के विकास में उपयोगी।
- Gene discovery और Pangenome analysis को बढ़ावा।
- Molecular Breeding तथा Genome Editing के लिए उपयोगी Genetic Resource।
- भारत की दाल उत्पादन क्षमता और खाद्य-पोषण सुरक्षा को मजबूती।
अरहर भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
अरहर भारत की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है। इसे तूर या Red Gram भी कहा जाता है। भारतीय भोजन में इसका प्रमुख उपयोग दाल के रूप में होता है और यह पौध-आधारित प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत है।
अरहर विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय (Tropical) और अर्ध-शुष्क (Semi-Arid) क्षेत्रों में उगाई जाती है। लगभग 600–650 mm वर्षा वाले क्षेत्रों में इसकी खेती उपयुक्त मानी जाती है।
अरहर से संबंधित प्रमुख रोग
| रोग | महत्व |
|---|---|
| Fusarium Wilt | अरहर का प्रमुख रोग |
| Sterility Mosaic Disease | महत्वपूर्ण वायरल रोग |
| Phytophthora Blight | महत्वपूर्ण रोग |
| Alternaria Blight | पत्ती एवं पौधे को प्रभावित करने वाला रोग |
| Powdery Mildew | फफूंदजनित रोग |
भारत में दालों की आत्मनिर्भरता और नवीन मिशन
अरहर के जीनोम पर यह उपलब्धि भारत के Mission for Aatmanirbharta in Pulses के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। यह मिशन वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू किया जा रहा है और इसका कुल वित्तीय परिव्यय ₹11,440 करोड़ है।
| मिशन का प्रमुख तथ्य | लक्ष्य |
|---|---|
| मिशन | Mission for Aatmanirbharta in Pulses |
| अवधि | 2025-26 से 2030-31 |
| वित्तीय परिव्यय | ₹11,440 करोड़ |
| 2030-31 उत्पादन लक्ष्य | 350 लाख टन |
| लक्षित क्षेत्र | 310 लाख हेक्टेयर |
| अतिरिक्त क्षेत्र विस्तार | 35 लाख हेक्टेयर |
| मुफ्त Seed Kits | 88 लाख |
| Processing Units | 1,000 |
| विशेष फोकस | तूर, उड़द और मसूर |
इस मिशन का उद्देश्य दालों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता घटाना, किसानों की आय बढ़ाना, बेहतर बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और Post-Harvest Infrastructure को मजबूत करना है।
तूर, उड़द और मसूर से जुड़ा महत्वपूर्ण तथ्य
Mission for Aatmanirbharta in Pulses के अंतर्गत Tur, Urad और Masoor पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने भाग लेने वाले राज्यों में पंजीकृत किसानों से इन दालों की MSP पर खरीद को मजबूत करने की व्यवस्था की है। NAFED और NCCF इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Exam Alert: “Mission for Aatmanirbharta in Pulses” को याद रखें — अवधि 2025-26 से 2030-31, परिव्यय ₹11,440 करोड़ और विशेष फोकस Tur-Urad-Masoor।
ICAR क्या है?
ICAR – Indian Council of Agricultural Research अर्थात भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भारत में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के क्षेत्र में शीर्ष राष्ट्रीय निकाय है। यह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के Department of Agricultural Research and Education (DARE) के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है।
| ICAR तथ्य | परीक्षा के लिए उत्तर |
|---|---|
| पूरा नाम | Indian Council of Agricultural Research |
| हिंदी नाम | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद |
| स्थापना | 16 जुलाई 1929 |
| पूर्व नाम | Imperial Council of Agricultural Research |
| मुख्यालय | नई दिल्ली |
| अधीनता | Department of Agricultural Research and Education (DARE), Ministry of Agriculture & Farmers Welfare |
| कानूनी स्वरूप | Societies Registration Act, 1860 के अंतर्गत Registered Society |
| स्थापना का आधार | Royal Commission on Agriculture की सिफारिश |
| मुख्य भूमिका | कृषि अनुसंधान, शिक्षा एवं संबंधित क्षेत्रों का समन्वय |
ICAR की स्थापना 16 जुलाई 1929 को Royal Commission on Agriculture की सिफारिशों के आधार पर हुई थी। इसका प्रारंभिक नाम Imperial Council of Agricultural Research था। स्वतंत्रता के बाद इसका नाम Indian Council of Agricultural Research रखा गया।
ICAR किन क्षेत्रों में काम करता है?
- फसल विज्ञान
- बागवानी
- मृदा एवं जल प्रबंधन
- कृषि जैव-प्रौद्योगिकी
- पशु विज्ञान
- मत्स्य विज्ञान
- कृषि अभियांत्रिकी
- कृषि अर्थशास्त्र एवं नीति
- कृषि शिक्षा
- जलवायु-स्मार्ट एवं टिकाऊ कृषि
ICAR पूरे देश में कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और पशु विज्ञान सहित कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के समन्वय, मार्गदर्शन और प्रबंधन में शीर्ष भूमिका निभाता है। आधिकारिक ICAR जानकारी के अनुसार वर्तमान राष्ट्रीय कृषि प्रणाली में 113 ICAR संस्थान और 74 कृषि विश्वविद्यालय शामिल हैं।
UPSC और State PCS के लिए प्रमुख ICAR संस्थान
| संस्थान | स्थान | मुख्य क्षेत्र |
|---|---|---|
| IARI – Indian Agricultural Research Institute | नई दिल्ली | कृषि अनुसंधान |
| IIPR – Indian Institute of Pulses Research | कानपुर, उत्तर प्रदेश | दलहन अनुसंधान |
| IIAB – Indian Institute of Agricultural Biotechnology | रांची | कृषि जैव-प्रौद्योगिकी |
| NIPB – National Institute of Plant Biotechnology | नई दिल्ली | पादप जैव-प्रौद्योगिकी |
| IIVR – Indian Institute of Vegetable Research | वाराणसी, उत्तर प्रदेश | सब्जी अनुसंधान |
| IIMR – Indian Institute of Millets Research | हैदराबाद | मिलेट्स अनुसंधान |
| IIRR – Indian Institute of Rice Research | हैदराबाद | चावल अनुसंधान |
| IIWBR – Indian Institute of Wheat & Barley Research | करनाल | गेहूं एवं जौ |
| IIOR – Indian Institute of Oilseeds Research | हैदराबाद | तिलहन |
| IISS – Indian Institute of Soil Science | भोपाल | मृदा विज्ञान |
इनमें विशेष रूप से IIPR-कानपुर परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दलहन अनुसंधान से संबंधित प्रमुख ICAR संस्थान है। ICAR की आधिकारिक संस्थान सूची में IIPR, IIVR, IIMR, IIRR, IIWBR, IIOR और IISS सहित अनेक संस्थानों का उल्लेख है।
भारतीय कृषि से जुड़े अति-महत्वपूर्ण Static GK
| प्रश्न/तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| भारत में हरित क्रांति का प्रमुख आधार | उच्च उपज वाली किस्में, सिंचाई, उर्वरक, कीटनाशक एवं कृषि तकनीक |
| हरित क्रांति का प्रमुख प्रभाव | गेहूं एवं चावल उत्पादन में तीव्र वृद्धि |
| दलहन का प्रमुख पोषण महत्व | पौध-आधारित प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत |
| अरहर का दूसरा प्रमुख नाम | तूर / Pigeonpea / Red Gram |
| अरहर का वैज्ञानिक नाम | Cajanus cajan |
| दलहन अनुसंधान का प्रमुख ICAR संस्थान | IIPR, कानपुर |
| कृषि जैव-प्रौद्योगिकी से संबंधित ICAR संस्थान | ICAR-NIPB, नई दिल्ली |
| कृषि अनुसंधान का राष्ट्रीय शीर्ष निकाय | ICAR |
| ICAR स्थापना | 16 जुलाई 1929 |
| ICAR मुख्यालय | नई दिल्ली |
कृषि में Biotechnology का महत्व
कृषि जैव-प्रौद्योगिकी का उपयोग पौधों में उपयोगी आनुवंशिक गुणों की पहचान, रोग-प्रतिरोध, कीट-प्रतिरोध, सूखा एवं ताप-सहनशीलता, पोषण संवर्धन तथा बेहतर उपज वाली किस्मों के विकास में किया जा सकता है।
अरहर का T2T Reference Genome इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि वैज्ञानिकों को अब फसल के आनुवंशिक संगठन का अधिक पूर्ण reference उपलब्ध होगा। इससे Molecular Breeding, Gene Discovery, Pangenomics और Genome Editing जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को गति मिल सकती है।
कृषि एवं Climate Resilience का संबंध
जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, नई कीट-बीमारियों और मिट्टी की गुणवत्ता में परिवर्तन जैसी चुनौतियां कृषि उत्पादकता को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए ऐसी फसल किस्मों का विकास महत्वपूर्ण है जो बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी स्थिर उत्पादन दे सकें।
Genome-based crop improvement से वैज्ञानिक ऐसे genes की पहचान कर सकते हैं जो drought tolerance, disease resistance, yield और nutritional quality जैसे गुणों से जुड़े हों।
UPSC GS Paper-3 में कैसे पूछा जा सकता है?
संभावित प्रश्न: भारत में अरहर के पूर्ण Telomere-to-Telomere Reference Genome के विकास का कृषि क्षेत्र में क्या महत्व है? यह उपलब्धि खाद्य सुरक्षा, जलवायु-सहिष्णु कृषि और जैव-प्रौद्योगिकी को किस प्रकार मजबूत कर सकती है?
उत्तर लिखते समय: T2T Genome → Gene Discovery → Molecular Breeding → Climate Resilience → Higher Yield → Nutritional Security → Pulse Self-Reliance की श्रृंखला का प्रयोग किया जा सकता है।
त्वरित Revision Capsule
- ICAR स्थापना: 16 जुलाई 1929
- ICAR पूर्व नाम: Imperial Council of Agricultural Research
- ICAR मुख्यालय: नई दिल्ली
- अरहर का वैज्ञानिक नाम: Cajanus cajan
- अरहर की प्रमुख किस्म: Asha
- नया Genome: Fully Annotated T2T Reference Genome
- गुणसूत्र: 11
- DNA: 752.65 million base pairs
- Genes: 36,557
- mRNAs: 48,008
- Transcriptome alignment: >99.9%
- Genome Assembly: NIPB_CcT2T_4
- NCBI Accession: GCF_000230855.1
- Mission for Aatmanirbharta in Pulses: 2025-26 से 2030-31
- Mission Outlay: ₹11,440 करोड़
- 2030-31 Pulse Production Target: 350 लाख टन
- विशेष फोकस: Tur, Urad, Masoor
- IIPR: कानपुर
- NIPB: नई दिल्ली
महत्वपूर्ण निष्कर्ष
अरहर की ‘आशा’ किस्म का पूर्ण Annotated T2T Reference Genome भारत में कृषि जीनोमिक्स की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह उपलब्धि भविष्य में अधिक उत्पादक, रोग-प्रतिरोधी, जलवायु-सहिष्णु और पोषण की दृष्टि से बेहतर दलहन किस्मों के विकास में सहायक हो सकती है।
इसे भारत की Pulse Self-Reliance, Food Security, Nutritional Security, Climate-Resilient Agriculture और Agricultural Biotechnology के व्यापक संदर्भ में पढ़ना चाहिए।
एक नजर में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य
| Topic | One-Liner |
|---|---|
| Current Affairs | ICAR ने अरहर ‘आशा’ का पूर्ण Annotated T2T Reference Genome विकसित किया। |
| Crop | Pigeonpea / Arhar / Tur |
| Scientific Name | Cajanus cajan |
| Genome | 752.65 million base pairs |
| Chromosomes | 11 |
| Genes | 36,557 |
| ICAR | स्थापना 16 जुलाई 1929; मुख्यालय नई दिल्ली |
| Pulse Mission | 2025-26 से 2030-31; ₹11,440 करोड़ |
| Target | 2030-31 तक 350 लाख टन दाल उत्पादन |
📚 परीक्षा उपयोगिता: यह विषय UPSC, UPPSC/UPPCS, BPSC, UPSSSC, SSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कृषि, जैव-प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खाद्य सुरक्षा, जलवायु-स्मार्ट कृषि और सरकारी योजनाओं के अंतर्गत महत्वपूर्ण है।
Source: PIB, Government of India; ICAR, Government of India.
Visit for more exam-oriented Current Affairs & Static GK: www.apnaupsc.in


Please do not enter any spam link in the comment box.