पृथ्वी ग्रह एवं चंद्रमा: अक्षांश, देशांतर, समय, ऋतुएँ व चंद्रयान-3 | UPSC Geography

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APNA UPSC • WORLD GEOGRAPHY SERIES

🌍 अध्याय 2: पृथ्वी ग्रह एवं इसका उपग्रह चंद्रमा

Planet Earth & Moon | अक्षांश-देशांतर | समय निर्धारण | पृथ्वी की गतियाँ | ऋतुएँ | चंद्रमा की कलाएँ | चंद्रयान-3

पृथ्वी ग्रह एवं चंद्रमा मास्टर नोट्स UPSC Geography
पृथ्वी ग्रह एवं चंद्रमा — UPSC, UPPSC, BPSC, UPSSSC Geography Master Notes

🌍 पृथ्वी और चंद्रमा: इस अध्याय में क्या पढ़ेंगे?

पृथ्वी सौरमंडल का एक विशिष्ट ग्रह है, जहाँ जीवन के लिए आवश्यक जल, उपयुक्त तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में पृथ्वी से संबंधित प्रश्न केवल सामान्य तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि अक्षांश-देशांतर, स्थानीय समय, मानक समय, पृथ्वी की गतियाँ, ऋतु परिवर्तन, विषुव-अयनांत, चंद्रमा की कलाएँ, ग्रहण और अंतरिक्ष मिशनों के कारण-परिणाम के रूप में भी पूछे जाते हैं।

इस अध्याय को इस प्रकार व्यवस्थित किया गया है कि अभ्यर्थी पहले पृथ्वी के आकार एवं स्थिति को समझे, फिर अक्षांश-देशांतर और समय गणना, उसके बाद पृथ्वी की घूर्णन एवं परिक्रमण गतियाँ, फिर चंद्रमा एवं उसकी कलाएँ और अंत में भारत के चंद्रयान-3 मिशन को समझ सके।

🎯 परीक्षा में सबसे अधिक उपयोगी हिस्से

  • पृथ्वी का वास्तविक आकार — Geoid
  • अक्षांश और देशांतर का अंतर
  • 1° देशांतर = 4 मिनट समय अंतर
  • IST और 82°30′ E का महत्व
  • अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा और तारीख बदलने का कारण
  • पृथ्वी की घूर्णन एवं परिक्रमण गति
  • विषुव और अयनांत
  • चंद्रमा की कलाएँ, ग्रहण और समकालिक घूर्णन
  • Chandrayaan-3, Vikram, Pragyan, Shiv Shakti Point और National Space Day

1. 🌎 पृथ्वी का परिचय और भौतिक स्वरूप

पृथ्वी सौरमंडल का सूर्य से तीसरा ग्रह है। यह एकमात्र ज्ञात ग्रह है जहाँ जीवन का अस्तित्व पाया गया है। पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग जल और लगभग 29% भाग स्थल से ढका है। इसी कारण पृथ्वी को सामान्यतः नीला ग्रह (Blue Planet) कहा जाता है।

📌 परीक्षा ट्रैप: पृथ्वी को सामान्यतः Blue Planet कहा जाता है। इसे “Green Planet” कहना मानक भौगोलिक नाम नहीं है।

पृथ्वी का वास्तविक आकार — Geoid

पृथ्वी पूर्णतः गोलाकार नहीं है। पृथ्वी घूर्णन के कारण विषुवत रेखा के पास थोड़ी उभरी हुई तथा ध्रुवों के पास थोड़ी चपटी है। पृथ्वी के वास्तविक भौतिक आकार को सामान्यतः Geoid (जियोइड) कहा जाता है।

तथ्य मान
विषुवतीय व्यास लगभग 12,756 किमी
ध्रुवीय व्यास लगभग 12,714 किमी
दोनों में अंतर लगभग 42 किमी

पृथ्वी पर भार अक्षांश के साथ क्यों बदलता है?

किसी वस्तु का भार पृथ्वी पर हर स्थान पर समान नहीं होता। इसका प्रमुख कारण पृथ्वी के घूर्णन तथा पृथ्वी के ध्रुवों पर चपटे और विषुवत रेखा पर उभरे होने से संबंधित है।

  • भूमध्य रेखा पर प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण अपेक्षाकृत कम होता है।
  • ध्रुवों पर गुरुत्वीय त्वरण अपेक्षाकृत अधिक होता है।
  • इसलिए भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर वस्तु का भार बढ़ता है।
  • वस्तु का द्रव्यमान (Mass) स्थान बदलने पर नहीं बदलता।
📚 भूगोल को आधार से समझें:
भूगोल एक विषय के रूप में (Geography as a Discipline)

2. 📍 अक्षांश रेखाएँ (Latitudes)

भूमध्य रेखा के समानांतर पूर्व-पश्चिम दिशा में खींची गई काल्पनिक रेखाओं को अक्षांश रेखाएँ कहते हैं। किसी स्थान का अक्षांश भूमध्य रेखा से उसकी कोणीय दूरी को दर्शाता है।

प्रमुख अक्षांश स्थिति
भूमध्य रेखा
कर्क रेखा 23½° उत्तर
मकर रेखा 23½° दक्षिण
आर्कटिक वृत्त 66½° उत्तर
अंटार्कटिक वृत्त 66½° दक्षिण

भूमध्य रेखा क्यों महत्वपूर्ण है?

  • यह 0° अक्षांश है।
  • यह पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध में बाँटती है।
  • यह पृथ्वी की सबसे बड़ी अक्षांश रेखा है।
  • यह एक Great Circle है।
📌 महत्वपूर्ण: 0° से 90° उत्तर तथा 0° से 90° दक्षिण तक अक्षांशीय स्थिति व्यक्त की जाती है। 90°N और 90°S वास्तविक ध्रुवीय बिंदु हैं।

3. 🌐 देशांतर रेखाएँ (Longitudes)

उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक खींची गई काल्पनिक अर्धवृत्ताकार रेखाओं को देशांतर रेखाएँ कहते हैं। ये किसी स्थान की प्रधान याम्योत्तर (Prime Meridian) से पूर्व या पश्चिम की कोणीय दूरी बताती हैं।

  • प्रधान याम्योत्तर = 0° देशांतर
  • पूर्वी देशांतर = 0° से 180° E
  • पश्चिमी देशांतर = 0° से 180° W
  • 180°E और 180°W एक ही देशांतर को दर्शाते हैं।

⏰ देशांतर और समय का संबंध

पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है। इसलिए पृथ्वी के घूर्णन को समय में बदलने पर:

360° = 24 घंटे
15° = 1 घंटा
1° = 4 मिनट

पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। इसलिए जो स्थान पूर्व में स्थित होगा, वहाँ सूर्य पहले दिखाई देगा और स्थानीय समय आगे होगा। इसी कारण:

पूर्व की ओर जाएँ → समय बढ़ेगा
पश्चिम की ओर जाएँ → समय घटेगा

🇮🇳 भारत का मानक समय (IST)

भारत का मानक समय 82°30′ पूर्वी देशांतर को मानक याम्योत्तर मानकर निर्धारित किया जाता है। यह देशांतर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के निकट से गुजरता है।

82°30′ = 82.5° और 82.5 × 4 = 330 मिनट = 5 घंटे 30 मिनट। इसलिए IST, UTC से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

4. 🕰️ प्रधान याम्योत्तर (Prime Meridian) और ग्रीनविच

0° देशांतर को Prime Meridian कहा जाता है। आधुनिक अंतरराष्ट्रीय मानक में इसका संदर्भ Greenwich, London से जुड़ा है। यह पृथ्वी को पूर्वी और पश्चिमी गोलार्द्ध में बाँटने के लिए आधार रेखा प्रदान करता है।

परीक्षा तथ्य: Prime Meridian से समय की गणना करते हुए पूर्व की ओर प्रत्येक 1° पर 4 मिनट जोड़े जाते हैं और पश्चिम की ओर 4 मिनट घटाए जाते हैं।

5. 📅 अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (International Date Line)

अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा लगभग 180° देशांतर के आसपास प्रशांत महासागर से होकर गुजरती है। इसे सीधी रेखा के रूप में समझना सही नहीं है, क्योंकि यह कई द्वीपों और राजनीतिक सीमाओं को ध्यान में रखते हुए स्थान-स्थान पर मुड़ती है।

एक दिन क्यों बदल जाता है?

इसे समझने का सबसे आसान तरीका है कि पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है। इसलिए 180° की दूरी समय के लगभग 12 घंटे के अंतर के बराबर है। पृथ्वी के विपरीत दिशाओं से 180° तक पहुँचने पर कुल समय-अंतर लगभग 24 घंटे हो जाता है।

यदि पूरी पृथ्वी पर स्थानीय समय को लगातार आगे बढ़ाते जाएँ तो 180° के आसपास पहुँचते-पहुँचते तारीख में एक दिन का अंतर बन जाता है। इस विसंगति को व्यवस्थित करने के लिए International Date Line के पास कैलेंडर की तारीख बदली जाती है।

📌 याद रखने का तरीका:

International Date Line को पश्चिम की ओर पार करने पर → एक दिन जोड़ते हैं।
पूर्व की ओर पार करने पर → एक दिन घटाते हैं।

ध्यान रखें कि वास्तविक International Date Line किसी एक देशांतर पर पूरी तरह सीधी नहीं है। यह मुख्यतः प्रशांत महासागर में द्वीपों और देशों को एक ही तारीख क्षेत्र में रखने के लिए zig-zag करती है।

6. ☀️ कर्क रेखा, मकर रेखा और महत्वपूर्ण अक्षांश

कर्क रेखा — 23½° उत्तर

कर्क रेखा उत्तरी गोलार्द्ध में लगभग 23½°N पर स्थित है। भारत में यह 8 राज्यों से होकर गुजरती है:

गुजरात → राजस्थान → मध्य प्रदेश → छत्तीसगढ़ → झारखंड → पश्चिम बंगाल → त्रिपुरा → मिजोरम

मकर रेखा — 23½° दक्षिण

मकर रेखा दक्षिणी गोलार्द्ध में लगभग 23½°S पर स्थित है। सूर्य की लंबवत किरणें वर्ष में एक बार इस अक्षांश तक पहुँचती हैं।

UPSC/State PCS Fact: अफ्रीका से कर्क रेखा, भूमध्य रेखा और मकर रेखा — तीनों गुजरती हैं।

7. 🔄 पृथ्वी की दो प्रमुख गतियाँ — Rotation और Revolution

घूर्णन (Rotation) परिक्रमण (Revolution)
पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर घूमना
लगभग 24 घंटे का सौर दिवस लगभग 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड
दिन-रात का प्रमुख कारण ऋतु परिवर्तन का प्रमुख कारण

🌍 पृथ्वी किस दिशा में घूमती है?

पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। यदि उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखा जाए तो पृथ्वी की घूर्णन दिशा वामावर्त (anticlockwise) दिखाई देती है।

याद रखें: पृथ्वी का Rotation → दिन-रात; Revolution + अक्षीय झुकाव → ऋतुओं का परिवर्तन।

8. 🌦️ ऋतु परिवर्तन क्यों होता है?

ऋतु परिवर्तन केवल पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर घूमने से नहीं होता। इसके लिए दो बातें विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं:

  1. पृथ्वी की धुरी का लगभग 23½° झुकाव
  2. पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर परिक्रमण।

पृथ्वी की धुरी अपनी कक्षीय तल के लंबवत से लगभग 23½° झुकी हुई है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते समय अपनी धुरी की दिशा लगभग समान बनाए रखती है। परिणामस्वरूप वर्ष के अलग-अलग समय पर सूर्य की किरणों का कोण और दिन की लंबाई बदलती रहती है।

9. ⚖️ विषुव (Equinox) और अयनांत (Solstice)

घटना लगभग समय मुख्य तथ्य
वसंत विषुव 20/21 मार्च सूर्य भूमध्य रेखा पर लंबवत
ग्रीष्म अयनांत 20/21 जून सूर्य कर्क रेखा पर लंबवत
शरद विषुव 22/23 सितंबर सूर्य भूमध्य रेखा पर लंबवत
शीत अयनांत 21/22 दिसंबर सूर्य मकर रेखा पर लंबवत
परीक्षा सावधानी: Equinox और Solstice की तारीख हर वर्ष बिल्कुल एक जैसी नहीं होती। इसलिए इन्हें सामान्यतः लगभग 20/21 मार्च, 20/21 जून, 22/23 सितंबर और 21/22 दिसंबर के रूप में समझना अधिक वैज्ञानिक है।
चंद्रमा की कलाएँ Moon Phases और चंद्रयान-3 UPSC Notes
चंद्रमा की कलाएँ एवं भारत का चंद्रयान-3 मिशन

10. 🌕 चंद्रमा — पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह

चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है। पृथ्वी से इसकी औसत दूरी लगभग 3,84,400 किमी है। इसका औसत व्यास लगभग 3,474 किमी है।

विशेषता महत्वपूर्ण तथ्य
पृथ्वी से औसत दूरी लगभग 3,84,400 किमी
पृथ्वी की तुलना में गुरुत्व लगभग 1/6
चंद्रमा का आकार पृथ्वी के व्यास का लगभग 1/4

Mass और Weight में अंतर — चंद्रमा पर क्या बदलेगा?

यदि पृथ्वी पर किसी व्यक्ति का द्रव्यमान 60 किलोग्राम है, तो चंद्रमा पर भी उसका द्रव्यमान लगभग 60 किलोग्राम ही रहेगा। लेकिन चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के लगभग 1/6 है, इसलिए उसका भार लगभग 1/6 रह जाएगा।

Mass → स्थान बदलने पर नहीं बदलता
Weight → गुरुत्वाकर्षण के साथ बदलता है

11. 🔄 चंद्रमा का एक ही भाग हमेशा क्यों दिखाई देता है?

चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर एक परिक्रमा लगभग 27.3 दिनों में पूरी करता है और लगभग इतने ही समय में अपने अक्ष पर एक घूर्णन भी करता है। इसे समकालिक घूर्णन (Synchronous Rotation) या Tidal Locking से समझा जाता है।

चंद्रमा के घूर्णन और परिक्रमण की अवधि समान होने के कारण पृथ्वी की ओर लगभग हमेशा उसका वही भाग रहता है। हालांकि चंद्रमा की Libration के कारण पृथ्वी से समय के साथ उसके कुल सतही क्षेत्र का लगभग 59% देखा जा सकता है।

UPSC Concept: “हम चंद्रमा का केवल 50% भाग देखते हैं” कहना सरल मॉडल में ठीक लगता है, लेकिन वास्तविकता में libration के कारण पृथ्वी से समय के साथ लगभग 59% सतह दिखाई दे सकती है।

12. 🌑 चंद्रमा की कलाएँ (Phases of Moon)

चंद्रमा स्वयं प्रकाश उत्पन्न नहीं करता। वह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है। पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की स्थिति बदलने के कारण हमें उसके प्रकाशित भाग का अलग-अलग आकार दिखाई देता है। इन्हीं बदलते रूपों को चंद्रमा की कलाएँ कहा जाता है।

अवस्था मुख्य स्थिति
अमावस्या चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के लगभग बीच में
शुक्ल पक्ष प्रकाशित भाग क्रमशः बढ़ता है
पूर्णिमा चंद्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी से लगभग पूरा दिखाई देता है
कृष्ण पक्ष दृश्य प्रकाशित भाग क्रमशः घटता है

13. 🌑 सूर्य ग्रहण और 🌕 चंद्र ग्रहण

सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण
चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है। पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है।
अमावस्या के आसपास संभव। पूर्णिमा के आसपास संभव।
चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है। पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
📌 महत्वपूर्ण: प्रत्येक अमावस्या और पूर्णिमा को ग्रहण नहीं होता, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर कक्षा के तल से लगभग 5° झुकी हुई है।

14. 🌕 Supermoon, Blue Moon और Blood Moon

  • Supermoon: जब पूर्णिमा चंद्रमा की पृथ्वी के निकटतम स्थिति (Perigee) के आसपास होती है, तो वह सामान्य से थोड़ा बड़ा और अधिक चमकीला दिखाई देता है।
  • Blue Moon: सामान्य लोकप्रिय परिभाषा में एक ही Gregorian calendar month में दूसरी पूर्णिमा को Blue Moon कहा जाता है। इसकी एक मौसमी परिभाषा भी है।
  • Blood Moon: पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी के वायुमंडल से होकर आने वाली सूर्य की लाल/नारंगी रोशनी के कारण चंद्रमा लाल दिखाई दे सकता है।

15. 🛰️ कृत्रिम उपग्रह (Artificial Satellites)

मानव द्वारा निर्मित वे यान जो पृथ्वी या किसी अन्य खगोलीय पिंड की कक्षा में स्थापित किए जाते हैं, कृत्रिम उपग्रह कहलाते हैं। इनका उपयोग संचार, मौसम पूर्वानुमान, पृथ्वी अवलोकन, नेविगेशन, वैज्ञानिक अनुसंधान और सुरक्षा आदि में किया जाता है।

कृत्रिम उपग्रह Artificial Satellite Geography UPSC
कृत्रिम उपग्रह — उपयोग एवं कक्षाएँ

Geostationary Satellite

पृथ्वी की भूमध्यरेखीय तल में लगभग 35,786 किमी की ऊँचाई पर स्थित वह कक्षा जिसमें उपग्रह पृथ्वी के घूर्णन के बराबर कोणीय गति से परिक्रमा करता है, Geostationary Orbit कहलाती है। ऐसे उपग्रह पृथ्वी से लगभग स्थिर दिखाई दे सकते हैं।

Polar Satellite

Polar satellites लगभग ध्रुवों के ऊपर से गुजरने वाली कक्षाओं में पृथ्वी का अवलोकन करते हैं। इनका उपयोग पृथ्वी अवलोकन, संसाधन मानचित्रण, मौसम और पर्यावरणीय निगरानी आदि में किया जाता है। इनकी ऊँचाई और आवर्तकाल मिशन के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

🌊 अगला संबंधित विषय:
समुद्र विज्ञान (Oceanography in Hindi)

16. 🚀 चंद्रयान-3: भारत की ऐतिहासिक चंद्र सफलता

भारत के चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम में Chandrayaan-3 एक ऐतिहासिक मिशन है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इसे 14 जुलाई 2023 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से LVM3-M4 प्रक्षेपण यान द्वारा लॉन्च किया।

23 अगस्त 2023 को विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के उच्च दक्षिणी अक्षांश वाले क्षेत्र में सफल soft landing की। भारत चंद्रमा पर सफल soft landing करने वाला चौथा देश बना और चंद्रमा के दक्षिणी उच्च-अक्षांश क्षेत्र में सफल landing करने वाला पहला देश बना।

📌 महत्वपूर्ण सुधार: Chandrayaan-3 को सामान्य रूप से “चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश” कहा जाता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से landing site वास्तविक भौगोलिक दक्षिणी ध्रुव पर नहीं था। यह लगभग 69° दक्षिणी अक्षांश के आसपास का उच्च दक्षिणी क्षेत्र था। परीक्षा में “south polar region / high southern latitude” वाला तथ्य अधिक सटीक है।
घटक महत्वपूर्ण तथ्य
प्रक्षेपण 14 जुलाई 2023
प्रक्षेपण यान LVM3-M4
लैंडर Vikram
रोवर Pragyan
सफल landing 23 अगस्त 2023
Landing site का नाम Shiv Shakti Point
National Space Day 23 अगस्त

🌑 चंद्रमा के दक्षिणी क्षेत्र में रुचि क्यों?

चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों के कुछ गहरे क्रेटरों में सूर्य का प्रकाश बहुत लंबे समय तक नहीं पहुँचता। ऐसे permanently shadowed regions में water ice की उपस्थिति के वैज्ञानिक प्रमाण मिले हैं। इसलिए ये क्षेत्र भविष्य के चंद्र वैज्ञानिक अनुसंधान और संसाधन अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

🇮🇳 Shiv Shakti Point और Tiranga Point

  • Shiv Shakti Point: Chandrayaan-3 के Vikram lander की landing site।
  • Tiranga Point: Chandrayaan-2 के Vikram lander के impact site को दिया गया नाम।
  • 23 अगस्त: भारत का National Space Day।
🌋 Earth की अगली कड़ी: पृथ्वी की आंतरिक संरचना, प्लेट विवर्तनिकी, भूकंप और ज्वालामुखी को समझने के लिए पढ़ें — प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत

⚡ 17. UPSC / UPPSC / BPSC / UPSSSC Quick Revision

  • पृथ्वी का वास्तविक आकार: Geoid
  • पृथ्वी का सूर्य से क्रम: तीसरा ग्रह
  • सबसे बड़ी अक्षांश रेखा: भूमध्य रेखा
  • भूमध्य रेखा:
  • कर्क रेखा: 23½°N
  • मकर रेखा: 23½°S
  • 1° देशांतर: 4 मिनट
  • 15° देशांतर: 1 घंटा
  • IST: 82°30′E
  • IST और UTC का अंतर: +5:30 घंटे
  • पृथ्वी का घूर्णन: पश्चिम से पूर्व
  • दिन-रात का प्रमुख कारण: Rotation
  • ऋतु परिवर्तन: अक्षीय झुकाव + Revolution
  • सूर्य की लंबवत किरणें कर्क रेखा पर: जून अयनांत के आसपास
  • सूर्य की लंबवत किरणें मकर रेखा पर: दिसंबर अयनांत के आसपास
  • चंद्रमा की औसत पृथ्वी-दूरी: लगभग 3,84,400 किमी
  • चंद्रमा का गुरुत्व: पृथ्वी का लगभग 1/6
  • सूर्य ग्रहण: अमावस्या के आसपास
  • चंद्र ग्रहण: पूर्णिमा के आसपास
  • चंद्रमा का समकालिक घूर्णन: Rotation period ≈ Revolution period
  • Chandrayaan-3 landing: 23 अगस्त 2023
  • Chandrayaan-3 lander: Vikram
  • Chandrayaan-3 rover: Pragyan
  • Landing site: Shiv Shakti Point
  • National Space Day: 23 अगस्त

📝 18. UPSC / State PCS PYQ-Pattern Practice

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(A) पृथ्वी पूर्णतः गोलाकार है।
(B) पृथ्वी ध्रुवों पर उभरी हुई है।
(C) पृथ्वी ध्रुवों पर चपटी तथा विषुवत रेखा पर उभरी हुई है।
(D) पृथ्वी का आकार पूर्णतः बेलनाकार है।

उत्तर: (C)
प्रश्न 2. दो स्थानों के बीच देशांतर का अंतर 30° है। उनके स्थानीय समय में कितना अंतर होगा?

(A) 30 मिनट
(B) 1 घंटा
(C) 2 घंटे
(D) 4 घंटे

उत्तर: (B)
क्योंकि 1° = 4 मिनट; 30 × 4 = 120 मिनट = 2 घंटे।
प्रश्न 3. भारत का मानक समय किस देशांतर पर आधारित है?

(A) 75°E
(B) 82°30′E
(C) 90°E
(D) 68°7′E

उत्तर: (B)
प्रश्न 4. ऋतु परिवर्तन का सबसे उपयुक्त कारण कौन-सा है?

(A) केवल पृथ्वी का Rotation
(B) केवल पृथ्वी की Revolution
(C) पृथ्वी का अक्षीय झुकाव और Revolution
(D) चंद्रमा की Revolution

उत्तर: (C)
प्रश्न 5. चंद्रमा पर किसी वस्तु का द्रव्यमान और भार पृथ्वी की तुलना में किस प्रकार बदलता है?

(A) दोनों घट जाते हैं
(B) द्रव्यमान घटता है, भार समान रहता है
(C) द्रव्यमान समान रहता है, भार लगभग 1/6 हो जाता है
(D) दोनों समान रहते हैं

उत्तर: (C)
प्रश्न 6. Chandrayaan-3 से संबंधित निम्न में से कौन-सा युग्म सही है?

(A) Vikram — Rover
(B) Pragyan — Lander
(C) Vikram — Lander
(D) Rohini — Lander

उत्तर: (C)

✍️ 19. Mains के लिए उत्तर लेखन में कैसे उपयोग करें?

पृथ्वी की गतियों, अक्षांश-देशांतर और चंद्रमा से संबंधित प्रश्नों को केवल तथ्यात्मक रूप में न लिखकर कारण → प्रक्रिया → परिणाम → उदाहरण के क्रम में समझाना अधिक प्रभावी है।

उदाहरण:

प्रश्न: ऋतु परिवर्तन के कारणों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर का ढाँचा:
1. पृथ्वी की धुरी का 23½° झुकाव
2. सूर्य के चारों ओर परिक्रमण
3. सूर्य की किरणों के कोण में परिवर्तन
4. दिन की अवधि में परिवर्तन
5. उत्तरी-दक्षिणी गोलार्द्ध में विपरीत ऋतुएँ
6. विषुव और अयनांत के उदाहरण

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NEXT CHAPTER

🌋 अध्याय 3: पृथ्वी की आंतरिक संरचना, चट्टानें, भूकंप एवं ज्वालामुखी

अगले अध्याय में पृथ्वी की आंतरिक परतों, भूगर्भीय संरचना, अंतर्जात एवं बहिर्जात बल, चट्टानों के प्रकार, भूकंप, ज्वालामुखी और प्लेट विवर्तनिकी को वैज्ञानिक तथा परीक्षा-उपयोगी तरीके से समझें।

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